जिला स्वास्थ्य विभाग फिजियोथेरेपिस्ट की कमी से जूझ रहा है। विभाग में लंबे समय से फिजियोथेरेपिस्ट के छह पद खाली पड़े हैं। विभाग के पास केवल एक ही फिजियोथेरेपिस्ट है। इसके सहारे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा जिला अस्पताल में रखी मशीनें भी पुरानी हो चुकी हैं। इसमें से कुछ बंद पड़ी है।
नागरिक अस्पताल में हर रोज फिजियोथेरेपिस्ट से जांच करवाने के लिए 50 से 60 मरीज पहुंच रहे है। इसमें कमर दर्द होने, कंधा दर्द होने, गर्दन में झटका लगने, जन्म से ही बच्चों के पैर मुड़े होने, जन्म के बाद बच्चों के मानसिक और शारीरिक तौर पर विकास न होने के मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञ की ओर से मरीजों की जांच कर उन्हें एक्सरसाइज करवाने के लिए कहा जाता है। अस्पताल में मरीजों को एक्सरसाइज करवाने को लेकर मशीनें रखी गई हैं। यहां पर एक से दो घंटे तक अलग-अलग तरीके से मरीजों को अभ्यास करवाया जाता है। इनमें सबसे अधिक मरीज 50 से अधिक आयु वाले पहुंच रहे हैं।
बच्चों को चलने के लिए करवाया जाता है अभ्यास
जन्म के बाद जो बच्चे चलने नहीं पाते उन्हें फिजियोथेरेपिस्ट की ओर से अभ्यास करवाया जाता है। इस तरह के बच्चों की जांच करने के लिए विभाग की ओर से डीईआईसी सेंटर में हर मंगलवार को कैंप लगाया जाता है। जन्म से ही जिन बच्चों के पैर मुड़े हुए होते हैं, उनका अस्पताल में ही इलाज किया जाता है। डीईआईसी सेंटर की ओर से बीते चार माह में ही इस तरह के आठ बच्चों का इलाज किया जा चुका है।
नागरिक अस्पताल से पीएचसी लेवल तक फिजियोथेरेपिस्ट तैनात करने का नियम
डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर जिले में बने नागरिक अस्पताल, उपमंडल अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी लेवल तक के केंद्र में फिजियोथेरेपिस्ट संबंधित कर्मचारी तैनात किया जाना आवश्यक है। सिरसा जिले में नागरिक अस्पताल में केवल एक ही फिजियोथेरेपिस्ट तैनात है। इनकी नियुक्ति भी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत की गई है।
वर्जन
जिले में छह वर्ष से कम आयु वाले बच्चे और 50 से अधिक आयु वाले बच्चों की फिजियोथेरेपी करने की आवश्यकता पड़ रही है। कई बच्चों के जन्म से ही पैर मुड़े होने पर इस तरह की दिक्कत आती है। 50 से अधिक आयु वाले लोगों को हर रोज एक्सरसाइज न किए जाने के कारण दिक्कत आती है। उनकी जांच करने के बाद एक्सरसाइज करवाई जा रही है। - डॉ. जगत सिंह, फिजियोथेरेपिस्ट, नागरिक अस्पताल सिरसा।