संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद पराली प्रबंधन के लिए प्रशासनिक अमला हरकत में आया है। सोमवार को लेकर एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस विभाग की टीमें गांवों व खेतों में पहुंचकर किसानों को पराली प्रबंधन के बारे में जागरूक करती नजर आईं। हालांकि इसके बाद भी जिले के गांव गांव नेजाडेलां कलां में पराली जलाने का मामला सामने आया है। इसको ट्रेस करके पुलिस ने संबंधित तीन महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
पराली के धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर पिछले दो दिनों बढ़ा हुआ है। गेहूं की बिजाई का सीजन एक नवंबर के साथ ही शुरू हो जाएगा। ऐसे में पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी होने की संभवना है। इसी कारण प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे में पूर्ण रूप से जिला प्रशासन की ओर से सभी आलाधिकारियों को फील्ड में उतार दिया है, ताकि किसान कम से कम पराली जाए। हालांकि जिले में अब तक पराली जलाने के छह मामले आ चुके हैं। इन किसानों पर अब तक 15 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है।
रात्रि गश्त के दौरान जलती मिली पराली
सदर थाना पुलिस के अनुसार रात्रि गश्त के दौरान गांव नेजाडेलां कलां में पराली जलाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलने पर मौके पर पटवारी श्रवण कुमार, ग्राम सचिव प्रदीप मिगलानी गांव नेजाडेला कलां, कृषि अधिकारी प्रभजोत सिंह को बुलाया गया। तीनों ने मौके पर जांच की तो पाया कि एक एकड़ भूमि में पराली जलाई गई है। पटवारी ने फर्द व इंतकाल के अनुसार भूमि मालिक मोना रानी पत्नी गगनदीप, रेणु बांसल पत्नी सागर गर्ग, उषा रानी पत्नी जगदीश राय वासी नेजाडेला कलां हाल सरदुलगढ़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सब इंस्पेक्टर ताराचंद्र ने बताया कि फसल के अवशेष जलाना, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223, 280 का उल्लंघन है। इसलिए तीनों महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
75000 एकड़ बढ़ा धान का रकबा
पिछले साल धान का रकबा 275000 एकड़ था, जो इस बार बढ़कर 350000 एकड़ हो गया है। इतने बड़े रकबे की पराली का प्रबंधन करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
पराली को जलाने के बजाय करें प्रबंधन
डबवाली के एसडीएम अर्पित संगल ने सोमवार को कई गांवों का दौरा कर किसानों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण होने के साथ-साथ भूमि को भी नुकसान हो रहा है। इसलिए जरूरी है कि किसान पराली को जलाने के बजाय बल्कि इसका प्रबंधन करें। वहीं, गांव जोधकां में एसडीएम राजेंद्र कुमार ने किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि पराली को जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति भी खत्म होती है। अगर किसान पराली का प्रबंधन करता है तो प्रदेश सरकार अनुदान भी देती है। पराली प्रबंधन को किसान अपनी आय का स्रोत बना सकते हैं।