संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिला 931 अंक के साथ लिंगानुपात के मामले में प्रदेशभर में दूसरा स्थान पर आया है। वर्ष 2022 में लिंगानुपात में सिरसा आठवें स्थान पर था। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता प्रयास व लगातार भ्रूण हत्या पर अंकुश के लिए की गई कार्रवाई से स्थिति पहले से बेहतर जरूर हुई है। हालांकि अभी भी सुधार की और गुंजाइश है।
बता दें कि लिंगानुपात में पांच बार प्रदेश में टॉप पर रहने वाला सिरसा जनवरी में आठवें स्थान पर खिसक गया था। इससे पहले वर्ष 2017 में भी सिरसा जिला प्रदेशभर में चौथे स्थान पर आया था। वर्ष 2015 व 2016 में लिंगानुपात में सिरसा टॉप रहा था। वर्ष 2019 में और 2018 में भी सिरसा नंबर एक पर रहा। हालांकि 2020 की शुरूआत में लिंगानुपात के मामले में सिरसा कुछ पिछड़ गया। इसके बाद वर्ष 2021 में सिरसा जिला फिर से लिंगानुपात में टॉप रहा। वर्ष 2021 में जिले में 1000 लड़कों के पीछे 947 लड़कियों का जन्म हुआ।
इन जिलों में इतना है लिंगानुपात
लिंगानुपात में जींद जिला पहले स्थान पर है। यहां 1000 लड़कों के मुकाबले 945 लड़कियां पैदा हुई हैं। सिरसा में 931, कुरुक्षेत्र में 927,झज्जर में 927, यमुनानगर में 922, अंबाला में 921, पानीपत में 920,पं चकूला में 919, नूंह में 918, रेवाड़ी में 918, पलवल में 914, हिसार में 904, फरीदाबाद में 904, भिवानी में 898, कैथल में 892, ग्रुरुग्राम में 887,च रखी दादरी में 883, करनाल में 879, सोनीपत में 878, महेंद्रगढ़ में 876 व रोहतक में 875 लड़कियां पैदा हुई हैं।
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पहले खराब लिंगानुपात वाले राज्यों में आता था प्रदेश
हरियाणा को पहले सबसे खराब लिंगानुपात वाले राज्यों में गिना जाता है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 919 के राष्ट्रीय औसत की तुलना में सबसे कम लिंगानुपात 834 था। इसको लेकर राज्य को निरंतर आलोचना का सामना करना पड़ता था। पिछले कुछ वर्षों में एसआरबी में लगातार सुधार देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार राज्य में साल 2015 में 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 876 थी। इसके बाद 2016 में बढ़कर आंकड़ा 900 हो गया। इसके बाद इसमें अगले कई साल तक सुधार देखा गया। इसके बाद 2017 में प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 914 हो गई और 2019 में एसआरबी बढ़कर 923 हो गया। लेकिन 2020 में कन्याओं की जन्म दर में कमी आई और लिंगानुपात 922 रह गया।
वर्जन
प्रदेश में सिरसा जिला लिंग अनुपात मामले में दूसरे स्थान पर है। एक हजार लड़कों के पीछे 931 लड़कियों का जन्म हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार भ्रूण लिंग जांच करने वालों पर धरपकड़ कर रही हैं। - डॉ. महेंद्र कुमार भादू, सिविल सर्जन, सिरसा।