संत नगर से तीन खिलाड़ी दीदार सिंह 1992, हरपाल सिंह 2004 और सरदार सिंह 2012-16 तक ओलंपिक में खेल चुके हैं। गांव में नामधारी कम्युनिटी द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जाता है। वहीं, कम्युनिटी के प्रधान सतगुरु उदय सिंह खिलाड़ियों के खेल सामग्री से लेकर आने जाने तक का खर्चा वहन करते है।
हॉकी कोच के अनुसार
राजेंद्र सिंह पहले भी दो बार इंटरनेशनल गेम्स में इंडिया टीम में खेल चुके हैं। इस दौरान इंडिया टीम ने गोल्ड मेडल जीता था। अब इस समय राजेंद्र सिंह स्पेन में हो रहे इंटरनेशनल टूर्नामेंट में खेलने के लिए गया हुआ है। --- हरविंद्र सिंह, हॉकी कोच
विश्वभर में मिनी क्यूबा के नाम से प्रसिद्ध भिवानी शहर के युवाओं का बॉक्सिंग खेल के प्रति रुझान बरकरार है। भिवानी शहर में करीब 14 बॉक्सिंग प्रशिक्षण अकादमी है, जिसमें करीब 1300 खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। वहीं, इसके अलावा अन्य ब्लॉक स्तर पर संचालित अकादमियों में करीब 1200 खिलाड़ी बॉक्सिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। खिलाड़ियों ने बातचीत के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया।
तमन्ना की कामयाबी पाने की चाह को लगे पंख
महिला खिलाड़ी तमन्ना ने बताया कि मैं ओलंपिक पदक विजेता बॉक्सर विजेंद्र सिंह के गांव कालूवास की निवासी हूं। फिलहाल भिवानी स्थित बीबीसी अकादमी में प्रैक्टिस करती हूं। यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। इसके अलावा कई राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। उसकी कामयाबी पाने की चाह को पंख लग चुके हैं। उम्मीद है कि आगे भी कामयाबी के लिए संघर्ष करती रहूंगी
देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य : प्रिया घनघस
प्रिया घनघस मूलरूप से गांव धनाना की निवासी हैं, लेकिन हाल ही में भिवानी में डाबर कॉलोनी में रहती हैं। उसने बताया कि बॉक्सर विजेंद्र सिंह को खेलते देख मेरा भी मन बाॅक्सिंग खेलने का हुआ। फिलहाल प्रिया भिवानी साई सेंटर में बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करती हैं। उसने बताया कि वर्ष 2023 जूनियर वर्ग में बेस्ट वुमेन का खिताब मिला है। उसने बताया कि देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य है।
विश्व में तिरंगे का शान बढ़ाना ही लक्ष्य है: स्वस्ति
मूलरूप से राजस्थान के अजमेर निवासी स्वस्ति ने बताया कि बॉक्सिंग खेल में भिवानी शहर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। यहां पर मिलने वाली खेल सुविधाओं को देखकर ही मैंने बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करने का फैसला किया। मैंने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कांस्य पदक हासिल किया है। आगे विश्व में तिरंगे का शान बढ़ाना ही लक्ष्य है।
मूलरूप से राजस्थान के जयपुर निवासी नेहा ने भी यहां की सुविधाओं से प्रभावित होकर भिवानी में खेलने का मन बनाया। यहां पर मिलने वाली खेल सुविधा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीत चुके खिलाड़ियों से मिलने वाले प्रशिक्षण के कारण यहां पर प्रैक्टिस करने का फैसला किया। जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में नेहा ने रजत पदक प्राप्त किया है।
द्रोणाचार्य अवार्डी बॉक्सिंग कोच के अनुसार
भिवानी जिले में भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों के किसी भी शहर के मुकाबले बॉक्सिंग खेल की प्रैक्टिस करने वाले सबसे ज्यादा खिलाड़ी हैं। भिवानी में अन्य राज्यों से खिलाड़ी प्रैक्टिस करने के लिए आते हैं। फिलहाल शहर में करीब 1200 खिलाड़ी विभिन्न अकादमियों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनमें से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं। भविष्य में इन खिलाड़ियों से ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स में पदक जीतने की उम्मीद है। -जगदीश कुमार, द्रोणाचार्य अवार्डी बॉक्सिंग कोच
हिसार की महिला खिलाड़ी हॉकी स्टिक का जादू न केवल देश, बल्कि विदेश में दिखा रही हैं। इन्हीं बेटियों से प्रेरणा लेकर हाॅकी की नर्सरी में खिलाड़ियों की नई पौध तैयार हो रही हैं। हिसार में चल रही नर्सरी में 25 बेटियां पसीना बहा रही हैं। इनमें से जिले की छह बेटियों ने इसी साल सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण तो दो बेटियों ने जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था। अब बेटियां अक्तूबर में होने वाले खेल महाकुंभ और नेशनल गेम्स में अपनी स्टिक का जादू दिखाती नजर आएंगी।
सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में छह बेटियों ने स्वर्ण तो जूनियर नेशनल में दो ने जीता कांस्य पदक
खेल विभाग की ओर से अप्रैल में हॉकी की खेल नर्सरी शुरू की गई थी। इस नर्सरी में 10 साल से लेकर 18 साल की बेटियां हॉकी की बारीकियां सीख रही हैं। इन बेटियों को प्रतिमाह डाइट के रूप में 1500 रुपये से लेकर 2000 रुपये मिलते हैं। खास बात है कि नर्सरी में प्रशिक्षण ले रही 25 बेटियों में से 22 बेटियां राज्य स्तरीय चैंपियनशिप खेल चुकी हैं।
इन बेटियों ने दिलाया प्रदेश को स्वर्ण व कांस्य पदक
इसी साल ओडिशा में हुई सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में जिले की पूजा, कीर्ति, शशि, मीनाक्षी, इशिका और सीमा ने स्वर्ण पदक हासिल किया था। वहीं, जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में पूजा मलिक और सावी ने प्रदेश को कांस्य पदक दिलवाया था। ये बेटियां सुबह-शाम पांच घंटे कोच रुचिका के पास प्रशिक्षण ले रही हैं।
इन बेटियों ने हिसार से की थी कॅरिअर की शुरुआत
मैंने 2015 में हॉकी से अपने कॅरिअर की शुरुआत हिसार से की थी। उस समय खेल के साथ-साथ पढ़ाई पर भी फोकस था। सुबह प्रशिक्षण लेने के बाद स्कूल जाना होता था। फिर स्कूल से आकर शाम को मैदान में जाती थी। छह साल तक हिसार में हॉकी का प्रशिक्षण लिया। फिलहाल मैं भोपाल में रहकर प्रैक्टिस कर रही हूं। पिछले साल इंफाल में हुई सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया था। -निकिता शर्मा, हॉकी खिलाड़ी।
वर्ष 2009 में जब हॉकी खेलनी शुरू की तो परिवार के सदस्यों ने मना कर दिया था। कहते थे कि लड़कियां गेम नहीं खेलती हैं। यह समय मेरे के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। मगर, मैंने हौसला नहीं तोड़ा और हिसार में कोच आजाद मलिक के पास प्रैक्टिस शुरू की। मैंने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया है। -पूनम रानी, हॉकी खिलाड़ी।
11 साल पहले हिसार के गिरी सेंटर में हॉकी से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। कोच आजाद मलिक ने मुझे हॉकी खरीदकर दिलाई। उसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हाल ही मैं मैंने एनआईएस पटियाला में कोच का कोर्स किया है। अब मेरा सपना कोच बनकर खिलाड़ी तैयार करना है। -पूजा गोस्वामी, हॉकी खिलाड़ी।