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हरप्रीत ब्लैकबोर्ड पर लिख सवांर बच्चों का भविष्य, बच्चों को पढ़ा रही अपने घर पर

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गांव मसीतां में हरप्रीत की पाठशाला में बैठ बच्चें। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। मन में जब कुछ करने का हो तो कोई भी बाधा किसी को नहीं रोक सकती है। फिर चाहे हालात कैसे भी हो सब काम बन ही जाता है। ऐसा ही कुछ कर दिखा रही हैं गांव मसीतां की हरप्रीत कौर। हरप्रीत अपने गांव में ही शिक्षा की ऐसी अलख जगा रही हैं कि कोई भी उसकी बिना तारीफ किए रह नहीं सकता। हरप्रीत ने अपने घर पर ही गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोल दिया है, जिसमें वो उनको निशुल्क में शिक्षा दे रही हैं।
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गांव के गरीब परिवारों के बच्चे महंगी शिक्षा हासिल नहीं कर सकते हैं। वहीं कुछ बच्चों के हालात ऐसे होते हैं कि वो राजकीय महाविद्यालय में भी जानकारी या जागरूकता के अभाव में भी शिक्षा नहीं ले पाते हैं। नतीजतन दूसरे बच्चों से ये पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं। इन बच्चों के लिए हरप्रीत कौर ने पहल की। हरप्रीत ने अपने घर पर ही स्कूल खोल दिया है, जिसमें बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। हरप्रीत के विद्यालय में अभी 50 बच्चे हैं, जो कि शिक्षा ग्रहण करते हैं।
घर-घर जाकर बच्चों किया जागरूक
गांव में बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो कि पढ़ाई से बिल्कुल ही ड्राप आउट हो चुके हैं। इन्हीं बच्चों को घर-घर जाकर हरप्रीत ने पहले जागरूक किया है। शुरुआती दिनों में हरप्रीत के पास 2 से 3 बच्चे थे। लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 50 तक हो चुकी है। इन बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्टेशनरी या किसी अन्य सामान की जरूरत होती है तो हरप्रीत उन्हें वह भी उपलब्ध करवाती हैं। हरप्रीत के पास कुछ बच्चे बस्तियों से आते हैं और कुछ आंगनबाड़ी से आते हैं। हरप्रीत के स्कूल में पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं।
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घर के आंगन में ही होती है सुबह की प्रार्थना
हरप्रीत भी मध्यम परिवार से आती हैं। उनके पिता किसान और माता गृहिणी हैं। हरप्रीत ने अपनी शिक्षा सिरसा की चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। हरप्रीत ने 2 विषयों में एमए, एमएससी भूगोल, बीएड और एनटीटी की हुई है। हरप्रीत के घर के आंगन में ही सुबह की प्रार्थना होती है। वहीं, कक्षाएं घर के बैठक में लगाती हैं। हालांकि कक्षा में कोई ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। एक कुर्सी पर ही ब्लैक बोर्ड और जमीन पर टाट-पट्टी बिछाकर कक्षाएं लगाई जाती है।
ईंट भट्ठों और गलियों में घूम रहे बच्चों को किया जागरूक
हरप्रीत कौर ने बताया कि गांव में ये बच्चे पहले ईंटों भट्ठों पर खेलते रहते थे। इन्हें देखकर मन में आता था कि इनके लिए कुछ करना चाहिए, इसलिए पहले वह इन बच्चों से मिलीं। इसके बाद इनके अभिभावकों से बातचीत कर इन्हें स्कूूल में आने के लिए जागरूक किया। बच्चों के अभिभावक पहले इनको स्कूल भेजने के लिए डरते थे। इसलिए इनको समझाया कि इन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए किसी प्रकार कोई शुल्क नहीं देना होगा और न ही किसी प्रकार का कोई खर्चा आएगा।
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