संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर के एक निजी पैलेस में शनिवार को अग्रसखी टीम ने तीज फुहार कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें अग्रवाल समाज की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पैलेस में डाले गए झूलों पर महिलाओं ने पींग चढ़ाई और जमकर मस्ती की। कार्यक्रम में आई महिलाओं ने अपने हाथों पर मेहंदी रचाने के साथ अन्य कार्यक्रमों में भाग लिया।
अग्रसखी की प्रधान शिंपी गर्ग ने बताया कि अग्रसखी तीज फुहार कार्यक्रम अग्रवाल समाज की महिलाओं में एकजुटता लाता है। यह हमें हमारी संस्कृति से रूबरू करवाने का काम करता है। हरियाली तीज आज बड़े पार्कों में झूले देखने को नहीं मिलते है। लेकिन अग्रसखी समाज की महिलाओं के लिए झूले से लेकर अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करता है। जिससे समाज की बेटियों, बहुएं और माताएं हमारी संस्कृति से जुड़ी रह सकें।
अग्रसखी सचिव चन्द्रिका गनेरीवाला ने बताया कि अग्रसखी तीज फुहार कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य एवं गीत के साथ विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं के लिए मेहंदी की स्टॉल लगाई गई। जहां पर महिलाओं ने अपने हाथों पर मेहंदी लगवाई। इसके अलावा महिलाओं के लिए खाने व अन्य सामान की स्टॉल लगाई गई। इस अवसर पर अंजू गोयल, सानिया गोयल समेत काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
तीज को लेकर किए जाने वाला कार्यक्रम बेहतरीन रहा। हमारी संस्कृति को कायम रखने के लिए हर वर्ष तीज पर यह कार्यक्रम समाज की ओर से आयोजित करवाया जाता है। जिससे हम अपने बीते दिनों और त्योहार के बारे में जान पाते हैं।
-कविता गोयल, शहरवासी
तीज हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। हरियाली तीज हमें बचपन की याद दिलाती है। जब परिवार की महिलाओं के साथ तीज पर झूला झूलते थे। यह कार्यक्रम हमारे लिए बेहद खास रहता है। इस कार्यक्रम का काफी बेसब्री से इंतजार रहता है।
-शानू गोयल, शहरवासी
तीज पर आयोजित अग्रसखी कार्यक्रम हमारे लिए बेहद खास होता है। यह हमारी संस्कृति है। कार्यक्रम के माध्यम से हम अपनी संस्कृति से जुड़ते हैं और इसके बारे में जान पाते हैं। ऐसे कार्यक्रम का आयोजन होते रहना चाहिए।
-लवली गोयल, शहरवासी
आज बागों में झूले नहीं लगते हैं। वक्त के साथ भले ही त्योहार में बदलाव आया है। लेकिन वक्त के इस बदलाव में महिलाओं की आपसी एकता का परिणाम है कि अग्रवाल समाज आज भी अपनी संस्कृति को बनाए रखे हुए है।
-वृद्धि गोयल, शहरवासी
हरियाली तीज को लेकर समाज की महिलाओं में हमेशा उत्साह रहता है। महिलाएं तीज का बेसब्री से इंतजार करती हैं। यह हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। आने वाली पीढ़ी के लिए जरूरी है कि वो भी इन सबके बारे में जाने।
-बिंदू सतनाली, शहरवासी