सिरसा। जिले में घग्गर का जलस्तर बीते 24 घंटे में पांच हजार क्यूसेक से बढ़कर 16 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। वीरवार तक 20 से 25 हजार क्यूसेक पानी पहुंचने की आशंका है। जिसके कारण घग्गर के आसपास के क्षेत्र में खतरे की स्थिति बनी हुई है। बीते दो दिनों में घग्गर का जलस्तर बढ़कर अब 16 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। वीरवार को पांच से आठ हजार क्यूसेक तक घग्गर का जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसके चलते प्रशासन की ओर से घग्गर के आसपास स्थित 45 गांवों को अलर्ट पर रखा गया है और लगातार घग्गर के बांधों का निरीक्षण करने व उसे मजबूत करने में जुटे हैं।
वहीं घग्गर के साथ स्थित मुसाहिबवाला से फरवाई और इसके दूसरी तरफ मल्लेवाला से अलीकां तक सरकारी बांध न होने के कारण इस क्षेत्र के किसानों व ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। किसान अपने स्तर पर ही बांध मजबूत कर रहे हैं। वहीं सिंचाई विभाग की ओर से अब एक लाख मिट्टी के बैग भरकर अलग-अलग साइफन पर रखवाए गए हैं।
सिरसा से 100 किलोमीटर लंबाई में घग्गर नदी बहती है। जिसके बांधों की देखरेख करने और उसे मजबूत करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार उसका निरीक्षण कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में घग्गर के छोटे बांध से अब करीब तीन से चार फुट पानी ही नीचे रह गया है। अगर वीरवार को जलस्तर 20 से 22 हजार क्यूसेक तक पहुंचता है तो स्थिति खराब होने का डर भी बना हुआ है। बुधवार को पंजाब में दो जगह पर घग्गर का बांध टूटने के बाद यहां अभी पानी की मात्रा कम है। जिससे अधिकारियों व किसानों को भी कुछ राहत मिली है।
मुसाहिबवाला से फरवाई और मल्लेवाला से अलीकां तक नहीं है सरकारी बांध
पंजाब से एंट्री के बाद घग्गर को सिरसा का पहला गांव मुसाहिबवाला लगता है। मुसाहिबवाला से फरवाई तक करीब सात किलोमीटर जबकि इसके दूसरी तरफ गांव मल्लेवाला से लेकर अलीकां तक 12 किलोमीटर के क्षेत्र में घग्गर पर सरकारी बांध नहीं है। घग्गर का जलस्तर बढ़ने के कारण यहां पर किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण व किसान अपने स्तर पर ही घग्गर के बांध को मजबूत करने में लगे हुए हैं। छोटे बांध के सहारे ही किसान गांवों व फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं किसान लखविंद्र औलख, हरविंद्र सिंह, जितेंद्र कुमार, भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकारी बांध न होने के कारण यहां पर पहले भी कई बार नुकसान हो चुका है। जब वह बांध को मजबूत करने के लिए अधिकारियों के पास जाते हैं तो सिंचाई विभाग उन्हें पंचायती विभाग के पास भेज देता है और पंचायती विभाग सिंचाई विभाग के पास भेजता है। वहीं उन्होंने रोष जाहिर करते हुए कहा कि अगर घग्गर में अधिक पानी आता है तो 20 से अधिक गांव इसकी चपेट में आ सकते हैं और नुकसान होने की आशंका है। लेकिन प्रशासन उनकी कोई भी सुनवाई नहीं कर रहा। अगर उनका घग्गर से किसी तरह का नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन व सरकार की होगी।
जलकुंभी ने बढ़ाई परेशानी, लगाई गई है अतिरिक्त जेसीबी व ट्रैक्टर-ट्राॅली
घग्गर में बहकर आई जलकुंभी ने आसपास के गांवों व अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। घग्गर के बीच में स्थित छोटे पुलों में जलकुंभी पानी निकासी में रुकावट बनी हुई है। काफी मात्रा में जलकुंभी होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। वहीं सिंचाई विभाग की ओर से ओटू से राजस्थान की तरफ और अन्य बांधों पर दो पोकलैंड मशीनें, छह जेसीबी और 15 ट्रैक्टर-ट्राॅली लगाए हुए हैं। जिसके माध्यम से जलकुंभी को नदी से बाहर निकाला जा रहा है। ताकि पानी की निकासी आसानी से हो सके।
यह है जलस्तर की स्थिति
स्थान, क्यूसेक
गुहला चीका, 83 हजार
खनौरी, 15 हजार
चांदपुरा, 13 हजार
सरदुलगढ़, 16 हजार
ओटू, 16 हजार
गांव मल्लेवाला से मुसाहिबवाला क्षेत्र में सरकारी बांध पंचायती विभाग के अधीन है। जिसे पंचायती विभाग की ओर से ही तैयार किया जाना है। किसान व पंचायती विभाग की ओर से ही इसको मजबूत किया जाना है। अन्य स्थानों पर बांधों को मजबूत कर दिया है। घग्गर में करीब 215 साइफन है। जिनके पास मिट्टी के बैग भरकर रख दिए गए है। अब तक एक लाख के करीब मिट्टी के बैग भरकर रखे गए है।
अजीत हुड्डा, एक्सईएन, घग्गर ब्रांच, सिंचाई विभाग सिरसा ।