रानियां। ओटू हेड से गांव फिरोजाबाद के समीप घग्घर के तटबंध को मजबूत करने के लिए मिट्टी डालने का काम तेजी से किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से मिट्टी डालने के लिए ट्रैक्टर-ट्रालियां लगाई गई हैं। वहीं किसानों भी स्वयं अपनी ट्रैक्टर-ट्राॅली में मिट्टी भरकर ला रहे हैं। जिसे बांध पर डाला जा रहा है।
मिट्टी डालकर बांध को मजबूत करने के साथ-साथ ऊंचा किया जा रहा है। दर्जनों ट्रैक्टर-ट्राॅलियां लेकर किसान मिट्टी डालने के कार्य में लगे हुए हैं। जेसीबी मशीन की सहायता से मिट्टी को बांध के साथ समतल करके उसे मजबूती दी जा रही है। बुर्जी नंबर 26 हजार गांव फिरोजाबाद से से लेकर ढ़ाणी सतनाम सिंह, आसा सिंह, संता सिंह, थेहड़ी मोहर सिंह, नकोड़ा, नगराना के समीप तटबंध पर मिट्टी डाली जा रही है।
गांव फिरोजाबाद के पास जहां बांध की चौड़ाई पहले कम थी वहां मिट्टी डालकर उसे चौड़ा करने का काम किया गया है। चूंकि बीते वीरवार को यहां पर घग्घर का पानी तटबंध को छू गया है। अभी भी यहां पर पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है जिसकी वजह से बाढ़ का संभावित खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को तटबंध के साथ पानी छह इंच और बढ़ गया। तटबंध के पास निगरानी के लिए बैठे किसानों ने पानी बढ़ने को लेकर निशान लगाए हुए हैं। जैसे ही पानी बढ़ता है किसानों को फौरन पता चल जाता है कि घग्घर में पानी बढ़ गया है। किसान जसवंत सिंह, काला सिंह सहित अन्य ने बताया कि बाढ़ के खतरे से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। प्रशासन का किसानों को पूरा सहयोग मिल रहा है। गांव के लोगों की मांग पर प्रशासन की ओर से मिट्टी के लिए ट्रैक्टर -ट्राॅलियों की व्यवस्था की गई है। इनमें मिट्टी भरकर लाई जा रही है और जिसे बांध पर डाला जा रहा है। मिट्टी से बांध का लेवल पहले के मुकाबले एक से डेढ़ फीट ऊंचा हो गया है। पानी अभी भी बांध के लेवल से 1 फीट नीचे है। जहां भी बांध पर मिट्टी कम हैं वहां मिट्टी पहुंच रही है।
बांध पर लाइट की पूरी व्यवस्था न होने से नाराज ग्रामीण
गांव फिरोजाबाद से लेकर आगे तटबंध पर दिन व रात्रि में निगरानी पर बैठे किसानों का कहना है कि लाइट की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। लाइट नहीं होने की वजह से रात्रि में अंधेरे में परेशानी होती है। रात को पानी में से जंगली जानवर व सांप बांध की तरफ आ जाते हैं। जिससे खतरा बना रहता है। हलांकि प्रशासन की ओर से तटबंध पर लाइट की व्यवस्था करवाई गई है लेकिन लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। किसानों व ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध पर 2-2 एकड़ तक कोई लाइट नहीं है। लाइट नहीं होने की वजह से रात्रि में लोग यहां पहरा देने से हिचकिचाते हैं। दिन में लोगों की संख्या अधिक होती हैं लेकिन रात को यहां बहुत कम लोग रह जाते हैं। अगर प्रशासन यहां लाइट की पर्याप्त व्यवस्था करवा दे तो यह मुश्किल हल हो जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध पर निरीक्षण के लिए आने वाले सभी अधिकारियों के आगे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता है। अधिकारी उनकी बात को नोट करके चले जाते हैं, लेकिन अभी तक व्यवस्था नहीं हो रही है।
ओटू हेड पर स्थिति भयावह, 44 हजार क्यूसेक पहुंचा पानी
ओटू हेड पर घग्गर के पानी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। शुक्रवार को जलस्तर करीब 2 हजार क्यूसेक और बढ़ कर 44 हजार तक पहुंच गया। यह ओटू हेड की क्षमता से कहीं अधिक है। हेड में लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण स्थिति तटबंध के साथ लगते गांवों में बाढ़ का संभावित खतरा बना हुआ है। बाढ़ के इस खतरे को लेकर ग्रामीण व किसान सभी डरे हुए हैं। तटबंध के साथ-साथ दर्जनों गांव पड़ते हैं जहां बाढ़ आने की संभावना है। हेड से 40 हजार क्यूसिक पानी आगे राजस्थान की ओर छोड़ा गया है। बणी हरियाणा व राजस्थान के अंतिम छोर पर पड़ता है। यहां से पानी आगे राजस्थान में प्रवेश कर जाता है। बणी साइफन से पानी राज कैनाल नहर में डाला जा रहा है। अब तक करीब 8 हजार क्यूसिक पानी राज कनाल नहर में डाला जा चुका है।
तटबंध पर बैठे लोग हुए बेघर
तटबंध के साथ पानी का लेवल बराबर होने की वजह से यहां मकान बनाकर बैठे लोगों के घरों में पानी घुस गया है। घरों में पानी घुसने की वजह से इन लोगों ने अपना सामान बाहर निकाल लिया है। ओटू हेड से गांव फिरोजाबाद के बीच तक दर्जनों परिवार तटबंध के समीप अपने मकान बनाकर बैठे हैं। जब तक पानी का बहाव तटबंध से नीचे चल रहा था तब तक इनको कोई खतरा नहीं था। अब पानी तटबंध के बराबर आने की वजह से घरों में आ गया है। अब यह लोग अपने मकानों को छोड़कर सुरिक्षत ठिकाने की ओर जाने की तैयारी कर रहे हैं। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि उनका कीमती सामान पानी में न डूब जाए इसलिए उसे बाहर निकाल लिया है। अब वह इसे ट्रैक्टर-ट्राली में लादकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
बांध की सफाई का काम भी शुरू
तटबंध के साथ लगते क्षेत्र में सफाई नहीं होने की वजह से ग्रामीण व किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। अब पंचायतों की ओर से बांध की सफाई का कार्य भी करवाया जा रहा है। चूंकि बांध पर उगी झाड़ियों के कारण पानी के रिसाव का पता नहीं चल पाता था वहां पर मनरेगा मजदूरों के द्वारा सफाई का कार्य करवाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर बांध की सफाई हो जाती है तो उनकी परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। क्योंकि झाड़ियों में जानवर व सांप छिपकर बैठ जाते हैं जिससे उनका पता नहीं लग पाता है।