संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मानसून शुरू होने से पहले ही सिंचाई विभाग ने घग्गर नदी के बांध मजबूत करने व निरीक्षण करना शुरू कर दिया है। सिरसा जिले में करीब 150 किलोमीटर लंबाई में घग्गर नदी बहती है। इसके लिए सिंचाई विभाग की घग्गर ब्रांच ने 24 टीमों का गठन किया है। विभाग ने घग्घर नदी को आठ सेक्टर में बांटा है। प्रत्येक सेक्टर के मुख्य अधिकारी को अलग-अलग संख्या में गांव दिए गए हैं। घग्गर नदी के आसपास जिले के करीब 59 गांव लगते हैं।
बीते दिनों हुई बारिश के बाद घग्गर नदी के बांध कई स्थानों से कमजोर भी हो गए हैं, कई स्थानों पर चुहों के बिल होने के कारण बांध टूटने के खतरा भी बना हुई है। स्थिति जांचने व उसकी मरम्मत करने के लिए विभाग की ओर से प्रक्रिया शुरू की गई है। सिरसा के फरवाई से लेकर ऐलनाबाद के राजस्थान साइफल तक 150 किलोमीटर लंबी घग्गर नदी को आठ भागों में बांटा गया है। प्रत्येक भाग में तीन टीमें तैनात रहेंगी और 24 घंटे तटबंधों का निरीक्षण करेंगी। घग्गर नदी में पानी आने और बाढ़ प्रबंधों का जल्द ही उपायुक्त की तरफ से निरीक्षण भी किया जाएगा।
बता दें कि पहले 15 जुलाई के बाद ही घग्गर नदी में पानी आता था। इस वर्ष मई में बारिश के चलते पहले ही घग्गर नदी में पानी आना शुरू हो गया। इसके चलते विभाग अब पहले ही सतर्क हो गया है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण इस वर्ष पहले के मुकाबले अधिक पानी आने की आशंका भी जताई जा रही है। हर वर्ष घग्गर खतरे की निशान से ऊपर बहती है। बीते कई वर्षों से घग्गर नदी के कारण गांवों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है।
घग्गर नदी के अंदर भी खेती करते हैं किसान
घग्गर के पानी से गांवों को किसी तरह का नुकसान न हो इसके लिए यहां पर दो बांध बने हुए हैं। घग्गर के छोटे बांध के बाद काफी किसान इसमें खेती भी करती है। इससे काफी दूरी पर बड़ा बांध बना हुआ है। इसकी देखरेख घग्गर ब्रांच की ओर से की जाती है। छोटे बांध की देखरेख किसान अपने स्तर पर ही करते हैं। बीते कई वर्षों से घग्गर के छोटे बांध तक ही पानी पहुंचता है। कई स्थानों पर छोटा बांध टूटने से कुछ किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ा है। बांध मजबूर करवाने को लेकर किसानों की ओर से भी कई बार अधिकारियों को मांग पत्र भी सौंपे गए हैं। विभाग की तरफ से केवल बड़े बांध की ही सुरक्षा किए जाने की जिम्मेदारी ली जाती है।
इन नहरों में छोड़ा जाता है घग्गर से पानी
ओटू हेड में पानी की क्षमता बढ़ने के बाद उसे शेरांवाली, एनजीसी ऑनलाइन, एनजीसी लाइन, नार्थ घग्गर कैनाल, मंगला माइनर, कसाबा माइनर में पानी छोड़ा जाता है। इससे जिले के करीब 100 से अधिक गांवों तक सिंचाई के लिए पानी की सप्लाई होती है। किसानों की ओर से नरमे, धान व अन्य फसलों की सिंचाई घग्गर से आने वाले पानी से ही की जाती है। चोपटा और ऐलनाबाद क्षेत्र में पानी की सबसे अधिक किल्लत रहती है। ऐसे में घग्गर के पानी से किसानों को राहत मिलती है।
वर्जन
बारिश के बाद स्थानों पर बांध कमजोर हुए है। बांधों का निरीक्षण कर उन्हें मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। घग्गर के बांधों की सुरक्षा के लिए 24 टीमें गठित की गई है। जोकि 24 घंटे निरीक्षण करेंगी। - अदीप हुड्डा, एक्सईएन, घग्गर ब्रांच, सिंचाई विभाग सिरसा।