बलविंद्र स्वामी
सिरसा। कृषि को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक नित नई खोजें कर उत्पादन बढ़ा रहे हैं। लेकिन इसके इतर कुछ और लोग भी हैं जो अपने स्तर कृषि क्षेत्र के लिए कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं मटदादू के शमशेर सिंह संधू। जिन्होंने स्नातक करने के बाद कुछ और करने की नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में ही कुछ बेहतर करने की ठानी। अपने तरीके से बनाए बीजों से 30 एकड़ जमीन में खेती करके शमशेर ने गेहूं और ग्वार की काफी अच्छी फसल ली। जिससे उसकी आर्थिक स्थिति तो मजबूत हुई ही, साथ ही कृषि क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए उसे कई बार सम्मानित भी किया गया।
कृषि क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए शमशेर को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। शमशेर को तीन राष्ट्रीय और तीन ही राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं। शमशेर द्वारा बनाए गए उन्नत किस्म के बीज साथ लगते गांवों के अलावा राजस्थान और पंजाब के किसान भी खरीद कर ले जाते हैं। 65 वर्षीय किसान शमशेर ने बताया कि स्नातक करने के बाद उसने कृषि क्षेत्र में ही कुछ बेहतर करने के बारे में सोचा। परंपरागत खेती में घाटे को देखते हुए इसी में कुछ नया करने का सोचा। वर्ष 1985 में पीएयू लुधियाना कृषि संस्थान से तीन माह का बीज उपचारित व किस्में तैयार करने का प्रशिक्षण लिया। इसके पश्चात गांव में आकर खेती करना शुरू कर दिया और इसी विधि से विभिन्न फसलों के बीजों को उपचारित कर किस्में तैयार की। संवाद
तकनीक अपना ली अच्छी फसल
शमशेर ने सबसे पहले गेहूं और ग्वार पर अपना प्रयोग किया। परंपरागत खेती में ही काम करते हुए शमशेर ने बीजों को उपचारित कर उनकी किस्मों में सुधार किया। गेहूं के उपचारित बीज से उसकी गुणवत्ता में सुधार हुआ। जिससे उपज में तो सुधार हुआ ही साथ क्वालिटी पर काफी फर्क पड़ा। जिससे उसके खेत में होने वाली फसल की मांग आसपास के क्षेत्र में काफी रहती है।
कैसे किया खेती के क्षेत्र में काम करना शुरू
किसान शमशेर सिंह संधू ने बताया कि उसने वर्ष 1985 से खेती करने लगा तब से लेकर अब तक लगातार नई-नई किस्मों को तैयार करने में प्रयास कर रहा हूं। उसके पास करीब 30 एकड़ भूमि है। वर्ष 1980 में क्षेत्र में नियुक्त कृषि विभाग के एडीओ ठाकुर मेघराज सिंह चंदेल के संपर्क में आया तो उन्होंने कृषि क्षेत्र में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। इसके पश्चात पीएयू लुधियाना विश्वविद्यालय से तीन माह का यंग फार्मर ट्रेनिंग कोर्स किया। इसके बाद खुद बीज उपचारित करने लगा। जिससे उसका मुनाफा बढ़ने लगा। शमशेर ने कहा कि अगर युवा पीढ़ी कृषि क्षेत्र में अपना रोजगार बनाए तो इससे भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।
ये मिल चुके अवॉर्ड
प्रगतिशील किसान शमशेर सिंह को प्रथम बार वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया। वहीं दूसरा राज्य स्तरीय पुरस्कार 2011 में मिला। इसके पश्चात इसी वर्ष राष्ट्रीय स्तरीय प्रोग्रेसिव फार्मर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं वर्ष 2015 में केंद्र के तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री ने राष्ट्रीय अवार्ड मिला। वहीं तीसरा अवॉर्ड वर्ष 2018 में मिला और 2019 में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने राज्य स्तरीय अवॉर्ड देकर सम्मानित किया।