सिरसा। धान की पराली जलाने के बजाय किसान उसका प्रबंधन करने की तरफ रूख कर रहे हैं। इसका ही नतीजा है कि बीते तीन वर्षों में पराली जलाने के मामलों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। जिले में वर्ष 2021 में 300 मामले पराली जलने के सामने आए थे। इसके बाद 2022 में 181 और इस वर्ष 2023 में अब तक कुल 111 मामले ही सामने आए हैं। इसमें से भी 59 लोकेशन गलत पाई गई है।
धान की पराली को जलाने के बजाय किसान उसकी गांठ बनाकर बनाकर बंदोबस्त कर रहे हैं और मुनाफा कमा रहे हैं। सिरसा से काफी मात्रा में किसान धान की पराली का प्रबंधन कर उसे या तो राजस्थान के व्यापारियों को बेच रहे हैं या फिर गोशालाओं में पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को लाभ मिलने के साथ ही पर्यावरण भी साफ रख रहे हैं। इस वर्ष प्रशासन की ओर से सख्ती किए जाने के बाद भी पराली जलने के मामलों में कमी देखने को मिली है। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस पराली प्रबंधन को लेकर लगातार किसानों को जागरूक करने के साथ ही गश्त भी कर रही है, ताकि पर्यावरण साफ रहे।
मशीनों के माध्यम से दो हजार रुपये में बनाई जा रहीं गांठे
जिले में किसान मशीनों के माध्यम से पराली की गांठे बना रहे हैं। मशीन मालिक खेत मालिक से दो हजार रुपये प्रति एकड़ ले रहे हैं। सरकार की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ किसानों को राशि दी जाती है। व्यापारी गांठे बनाकर उसे एक खेत में एकत्र कर रहे हैं और चारा बनाकर उन्हें ट्राॅलों के माध्यम से राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
इस वर्ष डेढ़ लाख का लगाया जुर्माना, पांच जगह पर मिली लोकेशन
बुधवार को जिले में पांच जगह पर पराली जलने के मामले मिले हैं। इनमें से तीन जोधकां और दो सुचान में पराली जलने के मामले मिले हैं। जिले में इस वर्ष अब तक कुल 111 मामले सामने आए हैं। इनमें से 59 जगह की लोकेशन गलत मिली है, जबकि 49 किसानों के चालान किए गए हैं। जिले में अब तक कुल एक लाख 57 हजार 500 का जुर्माना लगाया गया है।
सख्ती किए जाने के चलते अब पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। जिले में लगातार किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसके चलते स्थिति में पहले से सुधार देखने को मिल रहा है। किसान पराली का प्रबंधन कर रहे है।
- डॉ. सुखव कंबोज, कृदेषि उपनिदेशक, सिरसा।