सिरसा। बाढ़ के कारण जिले के 10 गांवों में काफी अधिक नुकसान हुआ था। जिसके कारण 10 हजार एकड़ से अधिक फसल जलमग्न हो गई थी और किसानों के मकान, ट्यूबवेल और खेतों में बने कमरे में क्षतिग्रस्त हो चुके है। लेकिन अभी केवल 200 के करीब ही किसान ई क्षतिपूर्ति पोर्टल नुकसान का रजिस्ट्रेशन करवा पाए हैं। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाने से पहले परिवार पहचान पत्र में दिए मोबाइल नंबर पर ओटीपी न आने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा। हालांकि अब पोर्टल की अंतिम तिथि 25 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।
किसान रजिस्ट्रेशन करवाने को लेकर पटवारियों की ड्यूटी लगाए जाने की मांग कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल, पशुधन, घर सहित अन्य नुकसान का मुआवजा देने के लिए सरकार की ओर से मेरी फसल मेरा ब्योरा और क्षतिपूर्ति पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए किसानों से अपील की गई है। बीते एक माह में नाम मात्र ही किसान इस पर रजिस्ट्रेशन करवा पाए हैं। इससे पहले क्षतिपूर्ति पोर्टल में प्रॉपर्टी आईडी का आप्शन आने के कारण किसान रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पा रहे थे। जिसकी शिकायत देने के बाद अब पोर्टल में बदलाव किया गया है। लेकिन इसके बाद अब फिर फैमिली आईडी में दिए गए नंबर पर ओटीपी आने के बाद ही पोर्टल को खोला जा सकता है। लेकिन फैमिली आईडी में दिए गए नंबर पर ओटीपी न आने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में किसान यहां पर नुकसान की कोई भी जानकारी नहीं दर्ज कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर प्रशासन की ओर से पटवारियों की जिम्मेदारी लगाई जाए तो उन्हें इसका लाभ मिल पाएगा।
25 अगस्त तक किसान करवा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
वहीं उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा बाढ़ से नागरिकों को हुई कठिनाइयों को कम करने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल https://ekshatipurtiharyana.gov.in के वृहत स्वरूप को लॉन्च किया है। पोर्टल पर नुकसान का ब्योरा दर्ज करने की तिथि 25 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर नागरिक अपने घर, पशुधन, फसलों और शहरी अपने वाणिज्यिक और चल-अचल संपत्ति की क्षति व नुकसान की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। नुकसान के दावे अपलोड करने के लिए यह पोर्टल आम जनता के लिए 25 अगस्त 2023 तक खुला रहेगा।
घग्गर का दोबारा जलस्तर बढ़ने से बढ़ी किसानों की चिंता, रात को दे रहे पहरा
वहीं घग्गर का जलस्तर बढ़ने के कारण अब फिर से स्थिति खराब हो रही है। पनिहारी सहित अन्य स्थानों पर किसानों ने अपने स्तर पर बांध तैयार कर लिया है। वहीं रात को भी अब किसान यहां पर पहरा दे रहे हैं। पनिहारी के किसान नरेश कुमार, सुखविंद्र सिंह, तरसेम सिंह, जसवंत सिंह ने बताया कि अब फिर से स्थिति खराब होना शुरू हो चुकी है। लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक न तो तेल दिया गया है और न ही अन्य कोई व्यवस्था की गई है। जिसके कारण वह खुद के खर्च पर ही गांव का बचाव कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक तेल संबंधित राशि भी किसानों को नहीं दी गई है।