सिरसा। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह साल तक की उम्र के बच्चों को पोषण के साथ प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध करवाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। स्थिति यह है कि जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर कहीं 20, कहीं 10 तो कहीं केवल एक-दो बच्चे दिखाई देते हैं। बाल वाटिका के आने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहालों की संख्या कम हो गई है।
जिले में कुल 1,378 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जिसमें करीब 1000 हजार कार्यकर्ता कार्यरत हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में से 90 को विभाग की ओर से प्ले स्कूल बनाया गया है। इन केंद्रों पर पहले जहां 30 से 40 बच्चों की संख्या हुआ करती थी, वहीं अब यहां पर 12 से 20 तक ही बच्चे आ रहे हैं।
बता दें कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर 0 से 06 वर्ष के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के साथ-साथ स्कूल पूर्व शिक्षा भी दी जाती है। बच्चों के कुपोषण दूर करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहम भूमिका रहती है। वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों पर संसाधन और सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ी है और सेवाओं में सुधार हुआ है। लेकिन हैरानी की बात यह कि केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति कम होने लगी है। यह स्थिति जिले के तकरीबन सभी केंद्रों की है। राजकीय स्कूलों में पिछले साल से खुले बाल वाटिका का असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर पड़ रहा है।
कई केंद्रों से बच्चों को ले जाते हैं बाल वाटिका संचालक
जिले में करीब सभी राजकीय प्राइमरी स्कूलों में बाल वाटिका का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में कुछ आंगनबाड़ी केंद्र कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिन प्राइमरी स्कूलों में उनके केंद्र बने हुए हैं वहां पर बाल वाटिका इंचार्ज व शिक्षक आकर बच्चों को ले जाते हैं। और वे उन बच्चों के अभिभावकों को बाल वाटिका भेजने के लिए फायदे बताते हैं। ऐसे में उन बच्चों के परिजन उनकी बातों में आकर आंगनबाड़ी केंद्र भेजने के बजाय बाल वाटिका में भेज देते हैं। जिसके कारण उन आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की संख्या कम होती जा रही है जो राजकीय प्राइमरी स्कूलों में बने हुए हैं।
जानिए... क्या है बाल वाटिका
नई शिक्षा नीति के तहत जिले में प्राइमरी स्कूलों में निजी या प्ले स्कूलों की तर्ज पर बाल वाटिकाएं इसी शिक्षा सत्र से शुरू की गई है। इनमें बच्चे खेल-खेल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जिले में 522 बाल वाटिकाएं शुरू की गई हैं। बाल वाटिकाओं में पहली कक्षा से पहले प्री नर्सरी की कक्षा लग रही हैं। जिसमें प्राइमरी स्कूलों के ही शिक्षक उन्हें शिक्षा दे रहे हैं। बाल वाटिका में बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाती है।
बाल वाटिका के आने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की संख्या बहुत कम हो गई है। पहले जहां बच्चों की संख्या 30 से 40 होती थी। वहीं अब यह सिमट कर 12 से 20 तक रह गई है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों से शिकायत भी मिली हैं कि बाल वाटिका संचालक केंद्रों से बच्चों को स्कूल में ले जाते हैं।
-मनप्रीत कौर, जिला प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हैल्पर सिरसा।
ऐसा कुछ भी नहीं है कि आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों को बाल वाटिका में लेकर आया जा रहा है। सरकार के निर्देश हैं कि 5 साल से ऊपर के बच्चों को राजकीय स्कूलों में भर्ती करवाया जाएगा। इन्हीं बच्चों को बाल वाटिका में भर्ती करवाया जा रहा है।
- डॉ. कपिल देव, जिला कोऑर्डिनेटर, एफएलएन सिरसा।