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Sirsa News: 3 साल बीतने के बावजूद रानियांवासियों को नहीं मिला पीने के लिए नहरी पानी

Fri, 07 Jul 2023 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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रानियां। पिछले 3 साल से शहर के लोगों को नहरी पानी उपलब्ध करवाने की योजना अधर में लटकी है। करोड़ों रुपये का यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया क्योंकि इसे पूरा करने के लिए जमीन का अधिग्रहण ही संभव नहीं हो पाया। नहरी पानी के लिए जलघर के निर्माण के लिए विभाग ने जिस जमीन को अधिग्रहण के लिए उपयुक्त माना है, किसान उसके लिए अधिक मुआवजा मांग रहे हैं। प्रशासन अधिग्रहित होने वाली जमीन के लिए 25 से 30 लाख रुपये मुआवजा राशि देना चाहता है जबकि किसान 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं। ऐसे में 17 ट्यूबवेलों के सहारे शहर में पानी सप्लाई किया जा रहा है।
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अधिग्रहित होने वाली जमीन का विवाद नहीं सुलझने का खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरीवश ट्यूबवेल का पानी पीना पड़ रहा है। ट्यूबवेल के पानी में टीडीएस अधिक होती है जोकि शरीर व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ट्यूबवेल का पानी पीकर लोग पेट के रोग व अन्य बीमारियों के संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। इस क्षेत्र में कैंसर जैसे असाध्य रोग बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार व प्रशासन इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है। उल्लेखनीय है कि सीएम अनाउंसमेंट के तहत रानियां शहर में नहरी पानी की सप्लाई के लिए जलघर का निर्माण होना है।
मुख्यमंत्री 2019 में जब खारियां रैली में शिरकत करने के लिए आए थे तो उनके सामने रानियां में नहरी पानी की सप्लाई की मांग रखी गई थी। इस मांग को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने शहर में नहरी पानी की सप्लाई के लिए जलघर बनाने की घोषणा की थी। इस बात को तीन साल से अधिक का समय हो गया है। शुरू में पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीरता दिखाई। नहरी जलघर के निर्माण के लिए जमीन की तलाश शुरू की गई। जो लोकेशन पसंद आई वहां जमीन अधिग्रहण करने के लिए उसका प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेज दिया गया। लेकिन बात अधिग्रहित होने वाले जमीन के मुआवजे पर आकर बिगड़ गई। जिसकी वजह से प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया। रानियां शहर के लोग नहरी पानी की सप्लाई से वंचित हो गए। अगर समय रहते सरकार व इस क्षेत्र के प्रतिनिधि करने वाले राजनेताओं ने इस मुद्दे को सुलझा लिया होता तो आज यह हाल नहीं होता।
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17 ट्यूबवेलों से हो रही शहर में सप्लाई

रानियां शहर में 15 वार्ड हैं। इन सभी 15 वार्डों के अंदर ट्यूबवेल से ही पेयजल सप्लाई होती है। कुल 17 ट्यूबवेल हैं जिनसे शहर भर में सप्लाई होती है। अमूनन गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहरा जाता है। बिजली कटौती की वजह से पेयजल सप्लाई में बाधा आती है। कई बार ट्यूबवेल की मोटर खराब होने सहित तकनीकी बाधा आने के कारण भी सप्लाई नहीं हो पाती। ऐसे में लोगों को पानी का पानी भरने के लिए दर ब दर की ठोकरे खानी पड़ती हैं। कई जगह मिट्टी वाला पानी आने की शिकायत भी रहती है। शहर के वार्ड नंबर 6 व 9 में मिट्टी युक्त पानी की सप्लाई होने की शिकायत अधिक हैं। मिट्टी और शोरा युक्त पानी पीने के कारण गर्मी में लोग बीमार पड़ते हैं।


शहर में 17 ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई की जा रही है। नहरी पानी के लिए जलघर के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है। इसलिए नहरी जलघर का निर्माण नहीं हो पाया। गर्मी के इन दिनों में पेयजल सप्लाई अतिरिक्त दी जा रही है। कहीं भी पेयजल किल्लत का संकट नहीं है। मटमैला पानी आने की शिकायत आती है तो उसको ठीक किया जाता है।

-सुरेंद्र भाटिया, जेई पब्लिक हेल्थ।



बिजली मंत्री ने इलाके के विकास की ओर नहीं दिया ध्यान : विशाल वर्मा
हरियाणा कांग्रेस ओबीसी सैल के पूर्व चेयरमैन विशाल वर्मा ने कहा कि बिजली मंत्री ने रानियां के लोगों से वोट लेकर उन्हें सिर्फ झूठे प्रलोभन देने का काम किया है। नहरी पानी रानियां शहर के लोगों की जरूरत है। चार साल खट्टर सरकार के बीत गए हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। इसका सबसे बड़ा कारण लापरवाही है। अगर बिजली मंत्री और विभागीय अधिकारी इस प्रोजेक्ट को लेकर रुचि दिखाते तो यह मुद्दा हल हो जाता। किसान जितनी मुआवजा राशि की मांग कर रहे हैं उन्हें दी जानी चाहिए। जमीन का अधिग्रहण करके जलघर का निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। लोग समझ गए हैं कि हमारे साथ धोखा हुआ है। रानियां क्षेत्र की कोई भी मुख्य डिमांड पूरी नहीं की गई है। रानियां आज भी उपमंडल बनने की घोषणा का इंतजार कर रहा है।
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