सिरसा। डेरा सच्चा सौदा का 75वां स्थापना दिवस सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में मनाया गया। डेरामुखी के एक दिन के पैरोल पर आने की सूचनाओं के बीच अनुयायियों की संख्या तो बढ़ गई लेकिन डेरामुखी नहीं आया। चिट्ठी से अनुयायियों के नाम संदेश जारी किया। परिवार के सदस्य विदेश में होने के कारण नजर नहीं आए, फिर एक हनीप्रीत ही उपस्थित रहीं। चिट्ठी में डेरामुखी ने एक बार फिर स्वयं को गुरु होने का हलके अंजाम में संदेश दिया।
जब से डेरामुखी ने मुख्य शिष्या और बेटी के रूप में हनीप्रीत को परिवार पहचान पत्र में शामिल किया है, तभी से अनुयायियों का एक धड़ा विरोध में खड़ा हो गया है। हालांकि ये सब खुलकर सामने नहीं आ रहा। चर्चाएं चलीं कि डेरा की परंपरा अनुसार केवल मुख्य शिष्य ही गद्दी पर बैठ सकता है, ऐसे में हनीप्रीत को गद्दी सौंपने की अफवाहें भी चलीं। डेरामुखी को सामने आकर अनुयायियों को स्पष्ट कहना पड़ा कि गुरु हम ही थे, हम हैं और हम ही रहेंगे।
स्थापना दिवस पर डेरामुखी ने अनुयायियों के नाम जेल से ही चिट्ठी जारी की। इसे सत्संग हॉल में बाकायदा पढ़कर सुनाया गया। इसमें डेरा के खिलाफ चल रहे धड़े को देखते हुए अनुयायियों को एकता में रहने का संदेश दिया। इस चिट्ठी के माध्यम से डेरा मुखी ने नई मुहिम उत्तम संस्कार शुरू करने की घोषणा की। इसके अलावा डेरामुखी ने कहा कि शाह मस्ताना महाराज ने 1948 में 29 अप्रैल को नींव रखने के बाद मई में पहला सत्संग डेरे में किया था, तो मई के आखिरी रविवार को सत्संग भंडारा मनाया करेंगे।
चिट्ठी में डेरा मुखी ने ये जारी किया संदेश
हमारे प्यारे बच्चों, ट्रस्ट प्रबंधक सेवादारों व सेवादारों,
आप सबको 75वें ‘स्थापना दिवस व 16वें जामे इन्सां गुरु का दिवस’ की बहुत बधाई व आशीर्वाद। धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा।
हमारे जान से प्यारे करोड़ों बच्चों आप सब अपने-अपने गांव व ब्लॉकों में जो ‘नामचर्चा’ कर रहे हैं, उसके लिए हम परम पिता परमात्मा से यह प्रार्थना करते हैं कि वो आपको इसका ‘फल’ आगे से सैकड़ों गुना बढ़ कर दें व जो आप ‘डेरों’ में आकर ‘नामचर्चा सत्संग’ सुनते हैं व सेवा करते हैं उसका फल आपको, हर बार, हजारों गुना बढ़के दें। परम पिता जी आपको बहुत-बहुत खुशियां रूपी ‘फल’ जरूर देंगे।
हमारे प्यारे बच्चो, जैसे आपको पता ही है कि हम आपके एमएसजी गुरु 1948 से ही सभी धर्मों का सत्कार करते हैं व ऊंच-नीच, जात-पात का भेदभाव नहीं करते, तो आप सब भी हमारी उपरोक्त बातों को मानते हैं पर जो 100 प्रतिशत इन बातों को मानेगा, परम पिता शाह सतनाम जी शाह मस्तान जी उन्हें तन्दुरुस्ती व रूहानी ताजगी बख्शेंगे। प्यारे बच्चों, भंडारे के इस शुभ अवसर पर एक नया मानवता भलाई का कार्य शुरू कर रहे हैं। आप रोजाना या 7 दिन में 3 बार आप अपने बच्चों को ‘मानवता व मानवता भलाई, सृष्टि की भलाई’ के बारे में शिक्षा देंगे, प्यार से समझाएंगे। इस कार्य का नाम है ‘उत्तम संस्कार’ आप हाथ खड़े करें। नारा लगाएं। हाथ नीचे कर लें। सतगुरु जी आप सबको बहुत-बहुत नई खुशियां दें व आपकी सबसे बड़ी जायज मांग जल्द से जल्द पूरी करें, वो जरूर से जरूर पूरी करेंगे।
हमारे अति प्यारे बच्चो, आप सब हमारी यानी आपके एमएसजी गुरु की बात मानते हुए, नामचर्चा व नामचर्चा सत्संग में ‘एकता व एक रहने का व अपने गुरु के ही बने रहने का प्रण करके नारा लगाते हो, तो हम भी आपको वचन देते हैं कि हम ही आपके एमएसजी गुरु थे, हैं व रहते हुए, आपके इस प्रण के बदले, हर बार परम पिता परमात्मा से आपको नई-नई रूहानी, नूरानी व दुनियावी खुशियां दिलवाते रहेंगे व आपके साथ व देह रूप में सामने आकर आप सबका मार्गदर्शन करते रहेंगे। शाह मस्ताना जी दाता ने 1948, 29 अप्रैल को नींव रखने के बाद मई में पहला सत्संग डेरे में किया था, तो मई के आखिरी रविवार को ‘‘सत्संग भण्डारा’’ मनाया करेंगे।
आशीर्वाद।
आपका एमएसजी गुरु दासन दास
गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां