सिरसा। साध्वी यौन शोषण, पत्रकार छत्रपति और रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में सजा काट रहे डेरामुखी गुरमीत राम रहीम की 40 दिन की पैरोल खत्म हो गई है। अब एक या दो दिन में डेरामुखी वापस जेल में आ सकता है। पैरोल खत्म होने से पहले ही डेरामुखी ने ऑनलाइन सत्संग बंद कर दिया है।
पैरोल अवधि के दौरान डेरामुखी यूपी के बागपत जिले के बरवाना स्थित आश्रम में रहा और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहा। ऑनलाइन सत्संग के साथ-साथ अनुयायियों से सीधा संवाद भी किया। गुरु गद्दी हनीप्रीत को सौंपे जाने को लेकर भी डेरामुखी ने स्पष्ट किया कि वही डेरा की गद्दी पर रहेगा।
डेरा मुखी गुरमीत सिंह को 15 अक्तूबर को 40 दिन की पैरोल मिली थी। उसी दिन वह बाहर आ गया। इस प्रकार 23 नवंबर को पैरोल अवधि समाप्त हो गई है। अब उम्मीद है कि एक-दो दिन के भीतर डेरामुखी जेल लौटेगा। सूत्र बताते हैं कि नियम अनुसार कैदी को घर आने और जाने के लिए दो दिन अतिरिक्त मिलते हैं, इसलिए उम्मीद है कि डेरामुखी कभी भी लौट सकता है। डेरामुखी रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। पैरोल अवधि के दौरान बरनावा स्थित आश्रम में पहुंचा था। यहां से ही ऑनलाइन सत्संग शुरू किया।
मैं ही रहूंगा गद्दी पर
पैरोल अवधि के दौरान चर्चाएं चली कि डेरा की गद्दी की कमान अब मुख्य शिष्या हनीप्रीत को सौंपी जाएगी। इस पर डेरामुखी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए ऑनलाइन सत्संग में कहा था कि डेरा की गद्दी पर वह था, वही है और वही रहेगा। साथ ही हनीप्रीत को रुहानी दीदी का भी नया नाम दिया। इतना ही नहीं सत्संग के दौरान पहली बार ऐसा हुआ कि जब डेरामुखी के सोशल मीडिया अकाउंट के साथ-साथ हनीप्रीत के भी सोशल अकाउंट का प्रमोशन किया गया। पैरोल अवधि के दौरान हनीप्रीत डेरामुखी के साथ ही रही।
चुनाव को जोड़कर देखा गया पैरोल अवधि
डेरामुखी ने जेल से बाहर आते ही सोशल मीडिया पर आकर अनुयायियों के नाम संदेेश जारी किया। इस दौरान शुरू से ही डेरामुखी ने ऑनलाइन गुरुकुल के नाम से सत्संग शुरू कर दिया। इतना ही नहीं सोशल मीडिया के माध्यम से ही नशा और दिवाली पर दो गाने भी रिलीज किए। अब पैरोल अवधि समाप्त होने के दो दिन पहले ही डेरामुखी ने ऑनलाइन सत्संग बंद कर दिए हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि डेरामुखी अब आखिरी दौर की बैठकें ले रहा है। डेरा संचालन को लेकर प्रबंधकों से चर्चा कर रहा है। डेरामुखी की पैरोल अवधि के दौरान हरियाणा पंचायत चुनाव, आदमपुर उपचुनाव और हिमाचल प्रदेश के चुनाव हुए। इसलिए पैरोल को चुनाव से जोड़कर भी देखा गया। सोशल मीडिया पर डेरामुखी कभी कुत्ते को बिस्कुट खिलाते हुए नजर आया तो कभी घोड़ा दौड़ाते हुए। ऑनलाइन सत्संग के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से भी डेरामुखी ने वर्चुअल संवाद स्थापित किया।
डेरा की रौनक लौटाई, लगातार किए कार्यक्रम
डेरामुखी के जेल जाने के बाद डेरा में बड़े कार्यक्रमों से रौनक गायब हो गई थी। कार्यक्रम तो होते थे, लेकिन पुराने सत्संग के वीडियो दिखाए जाते थे। ऐसा पहली बार हुआ था कि इस बार डेरामुखी का लाइव सत्संग शाह मस्ताना जी महाराज के जन्मदिवस पर आयोजित किया गया। बताया जा रहा है कि डेरामुखी के जेल जाने से पहले भी सिरसा डेरा में बड़ा आयोजन किए जाने की तैयारी की गई है।