संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। शहर में 27 वर्ष पहले हुए अग्निकांड का स्मरण करते हैं तो आज भी ऐसा महसूस होता है कि जैसे यह दर्दनाक हादसा कुछ दिन पहले हुआ था। इस भूलना बहुत ही मुश्किल है। इसने जीवन की दशा और दिशा बदल दी। यह बात एचपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल शेरगढ़ के संचालक व हादसे में जख्मी हुए आचार्य रमेश सचदेवा ने कही।
उन्होंने कहा कि इस अग्निकांड में उनके साथ बहुत से लोग जख्मी हुए थे और 442 लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि कई महीनों तक चले उपचार के बाद जब वह स्कूल पहुंचे तो अधजले हाथ और मुड़ चुकी उंगलियों को देखकर हर कोई हैरान था कि अब वह कैसे काम करेंगे? लेकिन परमपिता परमात्मा की अनुकंपा से अब वह पहले की भांति प्रत्येक कार्य करने में सक्षम हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में उनकी उपस्थिति कार्यक्रम को रोचक व यादगार बना देती है।
23 दिसंबर 1995 को डबवाली के राजीव मैरिज पैलेस में आयोजित डीएवी पब्लिक स्कूल के वार्षिक समारोह में यह अग्निकांड हुआ। इसके बारे में सचदेवा ने बताया वह भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। दीप प्रज्वलन के वक्त संकेतात्मक और दोपहर एक बजकर 47 मिनट पर आग ने ऐसा तांडव मचाया कि समूचा पंडाल चीत्कारों से भर गया। देखते ही देखते सभी अपनों को ढूंढने में, दूसरों को बचाने में लग गए। परंतु सब कुछ उस विधि के विधान द्वारा जैसा तय था वैसा होता रहा। उन्होंने कहा कि जब यह दुर्घटना हुई तो जो भी बन सका वह करने के बाद अंततोगत्वा मैं भी वहां गिर गया। बस देखते ही देखते मेरे पांव से मेरा जूता उतर गया और मैं बाहर निकल आया। बाहर आकर नीचे जमीन पर उल्ट-पल्ट कर स्वयं आग बुझाई। मैंने मेरे एक विद्यार्थी के पिता जी तथा मेरी बहन सुनैना जग्गा के पति सुनील जग्गा को पहचाना। मैंने उनसे कहा कि मुझे तुरंत मेरे भाई के पास सिटी क्लीनिक पर ले चलो। उन्होंने मुझे स्कूटर पर बैठाया और क्लीनिक पहुंचाया।
भाई के क्लीनिक में चल रहा था पहले ही कई मरीजों का इलाज
उन्होंने बताया कि क्लीनिक में पहले ही बहुत सारे मरीजों का इलाज चल रहा था। उसके भाइयों डॉ. डीडी सचदेवा व डॉ. लाजपत सचदेवा ने ध्यान उसकी ओर किया और अधिक गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया। मेरा इलाज शुरू हुआ, स्थिति बहुत ज्यादा नियंत्रण में नहीं थी। इसके बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन वहां पर भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। कुछ दिन वापस डबवाली बुला लिया। इसके बाद अंततोगत्वा डीएमसी लुधियाना में डॉक्टर अशोक गुप्ता के अधीन मेरा उपचार हुआ। इसके कारण मै अपने आप को लगभग स्वस्थ मानता हूं।