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भई बिल्लो आ गई क्या?

Thu, 07 Jul 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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ड्रग्‍स - फोटो : Azeem Ansari
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पिछले करीब एक साल से पुलिस की सख्ती के चलते मादक पदार्थ तस्करों के मंसूबों पर पानी जरूर फिरा है। बावजूद इसके जिले में पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान की ओर से मादक पदार्थ तो दिल्ली के भागीरथ पैलेस क्षेत्र से मेडिकल नशे की आपूर्ति हो रही है। पकड़े जाने से बचने के लिए तस्कर खरीद-फरोख्त में कोड वर्ड का प्रयोग कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस के सख्ती के चलते तस्कर कई गुना दाम वसूल कर रहे हैं। आईजी हिसार रेंज ओपी सिंह की ओर से तस्करों के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाई जा रही मुहिम के सार्थक परिणाम नजर आ रहे हैं। पुलिस ने पूरा ध्यान हरियाणा-पंजाब सीमा पर लगाया हुआ है। हालांकि अभी तक पुलिस के हाथ छोटी मछलियां ही आई हैं।
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चरस और गांजा के लिए चाचा-भतीजा जैसे शब्दों का हो रहा प्रयोग
पुलिस की सख्ती के बाद नशे के धंधे में शामिल लोग खरीद-फरोख्त के लिए कोड वर्ड का प्रयोग करने लगे हैं। पंजाब सीमा से सटे रोडी, कालांवाली और डबवाली क्षेत्र में मादक पदार्थ ‘चिट्टा’ को अब चिट्टा न कहकर आपूर्तिकर्ता से सीधे पूछा जाता है कि जनाब मजिठिया जी है अगला जवाब देता है हां जी तो खरीदने वाला बोलता है दो हजार रुपये देेने थे मजिठिया जी को यानि अगले को दो हजार रुपये वाली चिट्टा की पुड़िया चाहिए। अफीम के लिए काली बूटी, कल्लो, संजीवनी, अफीम दूध को ब्लैक ब्यूटी, चूरा पोस्त के लिए बुरादा, काली तूड़ी, चरस और गांजा के लिए चाचा-भतीजा जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। मेडिकल नशा जिसकी ज्यादातर आपूर्ति  दिल्ली के भागीरथ पैलेस क्षेत्र से की जाती है के नाम भी कोड वर्ड में लिए जाते हैं। एलप्रेक्स और अन्य एनडीपीएस ड्रग बिल्लो के नाम से मांगे जाते हैं तो फैंसीड्रिल, कोरेक्स और टोसेक्स के नाम डार्लिंग रखे हुए हैं। प्रोक्सीवान कैप्सूल का नाम शहजादा तो नशे के इंजेक्शन व सीरिंज के नाम राजा-रानी रखे हुए हैं। उधर नए ग्राहक को चिट्टा की आपूर्ति कुछ दिनों तक बहुत कम रेट पर उपलब्ध करवाई जाती है इसके बाद मनमानी कीमत मांगी जाती है। पुलिस सबसे ज्यादा चिट्टा को लेकर ही कार्य कर रही है पर बड़ी मछली हाथ नहीं आ रही है।

हैप्पी बर्थ डे किट बोले तो एमटीपी किट  
कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा अभियान चलाया हुआ है और अनेक डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और गिरोह में शामिल अन्य लोगों को बेनकाब किया गया है। मेडिकल स्टोर पर लगातार हो रही छापेमारी ने एमटीपी किट के दाम को कई गुना बढ़ा दिया है। चोरी छिपे इसकी बिक्री होता रही है और जारी भी है। गर्भपात में प्रयुक्त एमटीवी किट को अब स्टोर पर हैप्पी बर्थडे किट के नाम से मांगा जाता है। इस बारे में बेचने वाला और खरीदार ही जानता है पास खडे़ व्यक्ति को कुछ भी पता नहीं चलता। गर्भपात में प्रयुक्त होने वाली आयुर्वेदक दवाओं को सिस्टर के नाम से मांगा जाता है।
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मादक पदार्थों के शुष्क बंदरगाह के रूप में होती थी पहचान
बता दें कि सिरसा पंजाब और राजस्थान की सीमाओं से घिरा हुआ है कभी इसकी पहचान मादक पदार्थों के शुष्क बंदरगाह के रूप में होती थी। अफीम, चूरा पोस्त, डोडा, गांजा, चरस मध्यप्रदेश, राजस्थान से होते हुए सिरसा पहुंचती थी, जहां से पंजाब रवाना कर दी जाती थी। राजस्थान में पहले अफीम, भांग और चूरा पोस्त के सरकारी ठेके होते थे तो माल आसानी से सिरसा आ जाता था।

जमींदार मजदूरों को ज्यादा काम कराने को देते थे नशा, बन गए आदी
मजदूरों से ज्यादा काम कराने की नीयत से जमींदार उसे अफीम या चूरा पोस्त देता था बाद में वही मजदूर नशे का आदी हो जाता था। राजस्थान से सबसे ज्यादा नशा बाया संगरिया सिरसा जिले मेें प्रवेश करता था। दो साल पहले पुलिस ने जब डबवाली आ रही एक बस की तलाशी ली तो बस में सवार सभी 53 लोगों के पास चूरा पोस्त मिला था। महिलाओं और बच्चों को माध्यम बनाकर नशा ठिकाने तक पहुंचाया जाता है।

महिलाओं और बच्चों के सहारे होती थी सप्लाई
महिलाएं घाघरे में थैला लटकाकर अफीम इधर से उधर पहुंचाती थी तो स्कूली बच्चों के बैग में माल डालकर तस्कर सीमा पार कर देते थे। कभी सियासी लोग पुलिस के हाथ बांध दिया करते थे तो कभी पुलिस ही ध्यान नहीं देती थी। तत्कालीन एसपी विकास अरोड़ा ने इस  दिशा में काम किया और 85 ऐसे गांवों की पहचान की जहां पर नशे की आपूर्ति हुआ करती थी। बाद में उनका तबादला हो गया। इसके बाद एसपी अश्विन शैणवी ने इस पर काम किया पर उनका भी तबादला हिसार हो गया। इसके बाद उनकी मुहिम को एसपी सतेंद्र कुमार गुप्ता ने आगे बढ़ाया। पुलिस की सख्ती से मादक पदार्थ तस्कर पस्त हुए। आईजी हिसार रेेंज ने तो यूथ अगेंस्ट ड्रग एंड वायलेंस मुहिम चलाकर युवाओं की सोच बदलने की दिशा में काम किया है और सोशल मीडिया पर चलाई जा रही मुहिम के सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं।

थाना प्रभारियों की होगी जवाबदेही
पुलिस अधीक्षक सतेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि पुलिस विभाग की ओर से बनवाई गई फिल्म टर्निंग प्वाइंट दिखाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही सभी थाना प्रभारी अपने अपने क्षेत्र के नशा प्रभावित गांवों में बैठक लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस का विशेष प्रकोष्ट, सीआईए और सीआईडी अपने स्तर पर इस कार्य में जुटे हुए हैं साथ ही सभी थाना प्रभारियों को हिदायत दी गई है कि वे लोगों को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित करें और मादक पदार्थ तस्करों पर सख्त कार्रवाई करे। किसी क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करी का मामला पाया गया तो संबधित थाना प्रभारी पर कार्रवाई होगी। पुलिस की ओर से हेल्पलाइन नंबर 8814056100 जारी किया गया है। जिस पर मादक पदार्थ तस्करों के बारे में जानकारी दी जा सकता है सूचना देने वाले का नाम पता गुप्त रखा जाएगा।
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