जिला जेल में दोपहर को उपपुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस ने छापेमारी की। पुलिस कर्मचारियों ने जेल का चप्पा-चप्पा खंगाला। छापे के दौरान कैदी बैरक के बाथरूम से एक मोबाइल फोन मिला। हुडा चौकी पुलिस ने मोबाइल अपने कब्जे में लेकर अज्ञात पर केस दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता ने डीएसपी विजय कक्कड़ को पूरी कार्रवाई का जिम्मा सौंपा था। जेल में लगातार मोबाइल फोन मिलना जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है। जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता ने रविवार दोपहर डीएसपी हेड क्वार्टर को जेल में छापेमारी करने का आदेश दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ छापेमारी योजना बनाई। सीआईए स्टॉफ, शहर थाना, सदर थाना व हुडा चौकी पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद सीआईडी इंचार्ज अजय शर्मा व डीएसपी विजय कक्कड़ दोपहर तीन बजे जेल पहुंचे।
पुलिस फोर्स ने जेल में जाकर छानबीन शुरू कर दी। हवालाती व कैदी बैरकों की तलाशी के दौरान बैरक नंबर 13बी के बाथरूम में पुलिस को मोबाइल फोन मिला। मोबाइल में कोई सिम नहीं था। गौरतलब है कि सिरसा जेल अपराधियों के लिए आरामगाह बनी हुई है। मोबाइल फोन व मादक पदार्थ मिलना इस जेल में आम बात होकर रह गई है। जेल में हत्या व लूटपाट के मामले में बंद नामी शूटरों के पास से मोबाइल फोन मिल चुके हैं। एक साथ आधा किलोग्राम अफीम सिरसा जेल में मिली थी। सूत्रों के अनुसार जेल प्रशासन की मिली भगत के बिना जेल के अंदर सुई तक नहीं जा सकती। हर चीज का रेट तय है 15 से 20 हजार रुपये में जेल के अंदर मोबाइल पहुंचाया जाता है।
छापेमारी की सूचना हो गई थी लीक
पुलिस अधिकारी जेल में छापेमारी करने पहुंचे और बंदी रक्षकों की उन्हें देखकर घबराने की बजाए हंसने लगे तो समझ जाइए माजरा क्या है। हर बार की भांति जेल के अंदर छापेमारी की सूचना 25 मिनट पहले ही पहुंच चुकी थी। खास बात यह है कि जेल के बाहर अधिकारियों के इंतजार में खड़े पुलिस कर्मचारियों ने जेल के अंदर गतिविधि को ठीक करने का पूरा मौका दिया। जो भी आपत्तिजनक सामान बैरकों में था वह ठिकाने लगा दिया गया। जेल की काफी खांक छानने के बाद पुलिस को बाथरूम से बिना सिम वाला एक मोबाइल मिला। पुलिस प्रशासन की जेल में औचक छापेमारी की योजना कभी कारगर नहीं रही। हर बार सूचना लीक हो जाती है और जेल से अधिकारियों को ज्यादातर खाली हाथ लौटना पड़ता है या कभी एक आध मोबाइल के रूम में सफलता मिलती है