संगीन अपराधों में लिप्त कैदियों और आर्थिक रूप से संपन्न बंदियों के लिए सिरसा जेल वर्षों से आरामगाह बनी हुई थी है। इसका खुलासा जेल में बंद कैदियों और जेल कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किया है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भेजी गई शिकायत में कैदियों व जेल कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पिछले महीने सेवानिवृत्त हुए तत्कालीन सिरसा जेल अधीक्षक ने जेल में भ्रष्टाचार फैला रखा था। बंदियों व कैदियों से सहूलियत के बदले रुपये वसूल किए जाते थे। हरियाणा पुलिस महानिदेशक जेल यशपाल सिंघल ने मुख्यमंत्री के आदेश पर सिरसा जेल के तत्कालीन जेल अधीक्षक जेएस सेठी के खिलाफ सिरसा जेल से जुड़े प्रत्येक मामले की जांच जेल विभाग के एआईजी हरीश रंगा को सौंपी दी है। एआईजी हरीश रंगा ने सोमवार से जांच शुरू करते हुए सिरसा में डेरा डाल दिया है।
अपने निजी गाड़ी से सोमवार सुबह सिरसा जेल पहुंचे एआईजी रंगा ने घंटों तक सिरसा जेल मेें कैदियों, बंदियों व जेल अधिकारियों से बारी-बारी बातचीत की और उनके बयान लिए। सिरसा जेल के कार्यवाहक अधीक्षक संजीव पातड़ को पास पांच दिन पहले डीजी ऑफिस से पत्र पहुंचा था जिसमें आदेश दिए गए हैं कि तत्कालीन जेल अधीक्षक जेएस सेठी से जुड़े प्रत्येक विवाद की जांच एआईजी करेंगे। इसलिए आरोपी जेएस सेठी, शिकायतकर्ता कैदियों व जेल कर्मचारियों को जांच में शामिल होने को कहा जाए, जांच 17 अक्तूबर से शुरू होगी। एआईजी के आगमन को लेकर कार्यवाहक अधीक्षक संजीव पातड़ ने रविवार को ही उनके स्वागत की सारी तैयारियां पूरी कर ली। तीन दिनों तक जांच अधिकारी सिरसा में रहकर तत्कालीन जेल अधीक्षक जेएस सेठी पर लग रहे आरोपी की जांच करके अपनी रिपोर्ट डीजी जेल यशपाल सिंघल को सौंपेंगे।
दस हजार दो, बैरक में आराम करो
जेल सूत्रों के अनुसार कैदियों शिकायत में सीएम को बताया कि तत्कालीन जेल अधीक्षक जेएस सेठी कैदियों व बंदी से हर सहूलियत के बदले रुपये वसूलते थे। जो कैदी काम नहीं करना चाहता और कागजों में उसका काम दिखता रहे उसे बस दस हजार रुपये देने होते थे। इसके अलावा जेल में अगर परिवार के दो लोग कैद है उन्हें एक बैरक में रहने के लिए पैसे देने पड़ते थे। कैदी हरनेक सिंह ने शिकायत में कहा है कि उसका बेटा और वह सिरसा जेल में कई सालों से कैद है, उन्हें एक बैरक में रखने के लिए जेएस सेठी ने उससे दस हजार रुपये मांगे थे। यही नहीं सिरसा जेल में तत्कालीन अधीक्षक के कार्यकाल के समय मोबाइल फोन मिलना आम बात हो चुकी थी। सिरसा जेल में बंद हत्या व लूटपाट जैसे संगीन अपराधों को अंजाम दे चुके अपराधियों के पास मोबाइल मिले। जेल में ड्रग, मादक पदार्थ व नशे की गोलियां जेल के वार्डन पहुंचाया करते। एक वार्डन रंगे हाथ पकड़ा गया उसके खिलाफ भी विभागीय जांच जारी है।
दान में मिले वाटर कूलर, बिल बनाकर विभाग से वसूले रुपये
शिकायत करने वाले जेल कर्मियों ने खुलासा किया है कि सिरसा की समाज सेवी संस्थाओं ने कैदियों के लिए ठंडे पेयजल हेतु वाटर कूलर दान में दिए। तत्कालीन जेल अधीक्षक ने इन कूलरों के बिल बनवाकर जेल विभाग हजारों रुपये का क्लेम लिया। इसके अलावा जेएस सेठी ने अपने कार्यकाल के दौरान एमडीएच मसाला मालिक महाशय धर्मपाल का दो बार जेल में कार्यक्रम करवाया। इस दौरान तत्कालीन अधीक्षक ने प्रत्येक जेल कर्मचारी से एक-एक हजार रुपये वसूल किए। जेल में नाई और धोबी की तैनाती भी रिश्वत लेकर ही की जाती थी। मंदिर के रख रखाव के लिए प्रत्येक जेल कर्मचारी से रुपया वसूल किया जाता जबकि विभाग द्वारा हर चीज का रुपया भेजा जाता है।
ढाई वर्ष में मिले 21 मोबाइल
सिरसा जेल में ढाई वर्ष की अवधि में 21 मोबाइल फोन, मादक पदार्थ व नशे की गोलियां मिलने के कई मामले आ चुके हैं। तत्कालीन अधीक्षक के कार्यकाल के दौरान दो हत्यारोपियों ने जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या की जबकि एक तस्कर ने जेल में नशे की ज्यादा गोलियां खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त की। बताया गया है कि जेएस सेठी का प्रभाव इतना था कि कैदी व बंदी उनके खिलाफ शिकायत करने की हिमाकत नहीं करते थे। सिरसा जेल के ज्यादातर कर्मचारी तत्कालीन अधीक्षक के साथ थे। हुडा चौकी पुलिस जेल में मिले मोबाइल फोन मामलों की जांच शुरू करती लेकिन जेल प्रशासन उनका तनिक भी सहयोग नहीं करता। हुडा चौकी प्रभारी अशोक कुमार कहना है कि अधिक्तर मामलों की जांच इस कारण लंबित पड़ी है क्योंकि जेल अधिकारी पुलिस का सहयोग नहीं करते।
एक साल का मांग रहे थे अतिरिक्त कार्यकाल
जेएस सेठी 30 सितंबर 2016 को सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने हरियाणा महानिदेशक जेल यशपाल सिंघल को पत्र लिखकर एक साल अतिरिक्त कार्यकाल देने की मांग की थी लेकिन जेल विभाग ने तत्कालीन जेल अधीक्षक सेठी की इस मांग को ठुकरा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की कालांवाली रैली के दौरान उन्हें जेल में बुलवाने के लिए जेल अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कर्मचारियों से एक-एक हजार रुपये देने को कहा लेकिन कर्मचारियों ने साफ मना कर दिया।
तत्कालीन जेल अधीक्षक जेएस सेठी के खिलाफ शिकायत डीजी जेल को मिली थी। मामले की जांच के लिए एआईजी जेल हरीश रंगा सोमवार को सिरसा पहुंचे। वे मामले की जांच कर रहे हैं, वे कुछ दिन सिरसा में ही रहकर जांच करेंगे। मैंने अगस्त 2016 को जेल में उपअधीक्षक पद पर कार्यभार संभाला है। इस अवधि के दौरान मैंने जेल से 9 मोबाइल बरामद किए हैं। तत्कालीन जेल अधीक्षक जेएस सेठी 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो गए थे।
संजीव पातड़, कार्यवाहक जेल अधीक्षक सिरसा।