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दरिंदगी की हदें पार करने वाला आरोपी दोषी करार

Sat, 07 Nov 2015 12:29 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
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ढाई वर्ष की मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाने के बाद उसे मौत के घाट उतारने का प्रयास करने वाले युवक को विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी करार दिया है।
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न्यायाधीश संगीता राय ने इस मामले को जघन्य से जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा है। शनिवार को अधिवक्ताओं और शहरवासियों की निगाहें अदालत के फैसले रहेगी।

दरिंदगी की सारी हादें पार करने वाले दोषी आजाद कुमार के खिलाफ बलात्कार, जानलेवा हमला करने और पॉस्को एक्ट के तहत मामला चला था।

अभियोजन के अनुसार चंडीगढिया मोहल्ला में 20 फरवरी 2014 की शाम एक ढाई वर्ष की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी।

इसी दौरान इंद्रपुरी मोहल्ला निवासी रिक्शा चालक आजाद कुमार बच्ची को टॉफी का लालच देकर नेहरू पार्क ले गया। वहां उसने मासूम के साथ बलात्कार किया।

शराब के नशे में धुत आजाद ने साक्ष्य मिटाने के लिए बच्ची को मौत के घाट उतारने की ठान ली। आजाद ने पास पड़ी ईंट उठाई और मासूम के माथे पर दे मारी।

मासूम की चीख-पुकार  सुनकर पार्क से दूर खड़े लोग वहां पहुंचे और आजाद को पकड़ लिया। सिर पर गंभीर चोट लगने से बच्ची बेसुध हो गई थी, उसे नाजुक हालत में शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया।

सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। लोगों ने आजाद कुमार को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस की पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस ने आरोपी आजाद के खिलाफ धारा 307/376ए/376 व पॉस्को एक्ट के तहत केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया।

20 माह तक अदालत में चले इस मामले का निपटारा करते हुए स्पेशल कोर्ट की न्यायाधीश एडीजे संगीता राय ने आजाद कुमार को दोषी करार देकर सजा का फैसला सुरक्षित रख लिया।
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शनिवार को सजा का ऐलान करेंगी।

पांच दिन तक कोमा में थी मासूम
सिर पर ईंट के जोरदार वार से मासूम का सिर बुरी तरह से कुचला गया था। इस घटना ने शासन तक को हिलाकर रख दिया। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम निजी अस्पताल में भेजी।
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चिकित्सकों की जांच में मासूम की हालत लगातार नाजुक होती जा रही थी। प्रशासन ने कोई जोखिम न उठाते हुए उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर दिया।

पीजीआई में न्यूरो सर्जन ने ऑपरेशन कर मासूम की जान बचा ली। इसके बाद एक माह तक बच्ची का पीजीआई में उपचार चला

रेयरेस्ट ऑफ रेयर क्राइम
अदालत ने इस प्रकार के अपराध को दुर्लभ  श्रेणी में रखा  है। जिन धाराओं के तहत दोष साबित हुआ है उसमें कम से कम बीस साल सजा का प्रावधान है।

इसके अलावा इस जघन्य मामले को रेयरेस्ट मानकर अदालत अधिकतम सजा भी सुना सकती है। ऐसे में दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है।
राहुल शर्मा, अधिवक्ता एवं उपाध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन, सिरसा।
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