नाथूसरी चोपटा। करीब चार वर्ष पहले चोपटा क्षेत्र में गैंगरेप के बाद हुए मर्डर के मामले में अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है।
हरियाणा के डीजीपी के निर्देशन पर केस की निगरानी कर रहे आईजी श्रीकांत जाधव के नेतृत्व में बनी एसआईटी ने नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
वीरवार को खुद आईजी चोपटा पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। जांच के दौरान करीब एक घंटे तक आईजी पूरे पुलिस दलबल के सहित घटनास्थल पर रहे और घटना के दौरान लाश की स्थिति के अनुरूप डमी बनाकर घटना एक हादसा था या मर्डर इसकी संभावना जांची गई।
सीन ऑफ क्राइम ऑफिसर डॉ. जोगिंद्र सिंह ने आंकलन किया। इसके बाद आईजी घटना से जुड़े गवाह, पुलिस जांच अधिकारी व कर्मचारी तथा पीड़ित परिवार के बयान नोट किए।
आईजी श्रीकांत जाधव इससे पूर्व एसआईटी के सदस्य डीएसपी आर्यन चौधरी के साथ अक्तूबर माह में घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ की थी।
इस मौके पर फतेहाबाद एसपी ओपी नरवाल, डीएसपी ऐलनाबाद कुलदीप बैनीवाल, चोपटा एसएचओ परमजीत, एसएचओ सुखदेव, एचएचओ बलवंत जस्सु, डीएसपी आर्यन चौधरी, अजीत सिंह, धर्मवीर, जगदीश जोशी, पीड़ित परिवार के सदस्य मौजूद थे।
ये है मामला
करीब चार वर्ष पूर्व चोपटा क्षेत्र के गांव कागदाना क्षेत्र में सिरसा-भादरा रोड पर एक किशोरी मृत अवस्था में मिली थी। मृतक की पहचान राजस्थान के गांव चिड़िया गांधी निवासी के रूप में हुई थी।
शुरुआती जांच में चोपटा पुलिस ने मामले को रोड एक्सीडेंट मानकर कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया था। लेकिन उस समय किशोरी के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाते हुए हत्या की आशंका जाहिर की थी।
परिजन मामले को कोर्ट में ले गए। जांच में सामने आया कि किशोरी का गैंपरेप हुआ है और उसके बाद उसे मौत के घाट उतार दिया गया। मृतक के पिता की याचिका पर कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
अब जगी है न्याय की उम्मीद
किशोरी के ममेरे भाई गांव कागदाना निवासी सलाउदीन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अब उम्मीद लगी है कि उन्हें जरूर न्याय मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब चार वर्ष से हम इस मामले को लेकर काफी परेशान रहे हैं। हमारी अब एक ही मांग है कि दोषी लोगों को बेनकाब किया जाए, वहीं मामले को गंभीरता से न लेने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।