भ्रूण लिंग जांच मामले में आरोपी डॉक्टर संजीव कौशल की जमानत याचिका को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संगीता राय की अदालत ने खारिज कर दिया है।
इससे पहले न्यायाधीश संगीता राय ने 24 दिसंबर को आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उसे अंतरिम राहत देकर 26 दिसंबर को पुलिस जांच में शामिल होने का आदेश दिया था।
16 दिसंबर को डॉक्टर संजीव कौशल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। नियमित जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब पुलिस पुलिस डॉक्टर कौशल को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि 20 नवंबर को सिविल सर्जन को मिली गुप्त सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डबवाली रोड स्थित सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर में छापेमारी की। सूचना देने वाले ने बताया था कि सेंटर संचालक रेडियोलॉजिस्ट डॉ. कौशल चार से 14 नवंबर तक बाहर गए हुए थे।
पीछे से यहां पर रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में सैकड़ों लोगों का अल्ट्रासाउंड हुआ। यहां तक कि भ्रूण लिंग जांच भी की गई। इसके बाद डिप्टी सीएमओ विरेश भूषण, आरएमओ डॉ. विपुल गर्ग के नेतृत्व में टीम ने छापा मारा।
छापेमारी से सेंटर के स्टाफ में हड़कंप मच गया। स्टाफ ने ने फोन करके संचालक डॉ. कौशल को छापेमारी की सूचना दी। इसके संचालक मौके पर पहुंचे और स्वास्थ्य विभाग की टीम से बातचीत की। विभाग की टीम ने अल्ट्रासाउंड मशीन की जांच की और डीवीआर कब्जे में ली। टीम सारा रिकॉर्ड और अन्य रजिस्टर भी कब्जे में लिए हैं।
इसके बाद अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर दी गई। सिविल सर्जन सूरजभान कंबोज ने शहर थाना पुलिस में शिकायत दी और 25 नवंबर को पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पीसी/पीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया।