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Sirsa: सहकारी खाद घोटाले में रिश्वत लेने के आरोप में विजिलेंस के सिपाही के खिलाफ मामला दर्ज

Thu, 11 Aug 2022 02:59 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)

सार

आडियो वायरल होने और गुमनाम पत्र मिलने के बाद स्टेट विजिलेंस ने जांच की। राज्य चौकसी ब्यूरो के महानिदेशक को एक गुमनाम शिकायत मिली थी, जिसमें सिरसा उपकेंद्र के निरीक्षक अनिल कुमार व सिपाही अजीत सिंह पर आरोप लगे थे।  
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा के सिरसा में सहकारी समिति सिरसा में खाद घोटाले में रिश्वत लेने के मामले में  स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के उप महानिरीक्षक शिव चरण की जांच के बाद सिपाही अजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच रिपोर्ट में इंस्पेक्टर अनिल कुमार के कमजोर नियंत्रण को लेकर कठोर टिप्पणी की गई है। इस मामले में एक आडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद विभाग ने दोबारा जांच करते हुए पाया कि आरोपी सिपाही ने छह लाख 40 हजार रुपये रिश्वत ली और करीब सात महीनों के बाद राशि वापस कर दी थी।

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राज्य चौकसी ब्यूरो के महानिदेशक को एक गुमनाम शिकायत मिली थी, जिसमें सिरसा उपकेंद्र के निरीक्षक अनिल कुमार व सिपाही अजीत सिंह पर आरोप लगे थे कि उन्होंने सहकारी समिति सिरसा के सवा करोड़ रुपये खाद घोटाले में 13 लाख रुपये लेकर कर्मचारियों को गुमराह किया है। सिरसा जिले में सरकारी कार्य के ठेकेदारों से विजिलेंस का भय दिखाकर  नेशनल हाइवे नौ पर अनिल कुमार ने चार मरला तीन कनाल भूमि अपने नाम खरीदने के आरोप लगाए।

सिपाही अजीत सिंह पर पांच कनाल जमीन अपनी पत्नी सुशीला व नम्रता पत्नी नरेश कुमार के नाम से गैर कानूनी तरीके से खरीदने के आरोप लगाए। इन आरोपों की सत्यता की जांच के लिए सिपाही अजीत सिंह व सहकारी समिति के कर्मचारियों के बीच वार्तालाप की रिकार्डिंग का अध्यन्न किया। इसके साथ ही सहकारी समिति सिरसा के कर्मचारियों फकीर चंद, धर्मबीर, विजिलेंस के निरीक्षक अनिल कुमार, सिपाही अजीत सिंह व ईएसआई विरषा सिंह से पूछताछ की गई।
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इसमें सहकारी समिति के कर्मचारियों ने बयान दिया कि निरीक्षक अनिल कुमार व सिपाही अजीत सिंह ने उनके खिलाफ जांच में कोई रिश्वत नहीं ली।  बाद में 14 मार्च को ईएचसी अनिल व एएसआई विनोद कुमार ने तीन पेन ड्राइव पेश की, जिसमें जीएम सहकारी समिति फकीर चंद, कर्मचारी धर्मवीर व एएसआइ विनोद कुमार की बातचीत की रिकार्डिंग थी।

इस रिकार्डिंग में  नए तथ्य उजागर होने के बाद 21 मार्च को फिर से फकीर चंद, धर्मबीर को दोबारा बुलाकर पूछताछ की गई। जिस पर फकीरचंद ने बयान दिया कि उसने तीन मार्च को दबाव में झूठा बयान दिया था। सच्चाई यह है कि राज्य सतर्कता ब्यूरो हिसार मंडल के उपकेंद्र में छह मार्च 2018 से जांच चल रही है।

इस जांच को जल्दी निपटाने के लिए सभी दस कर्मचारियों ने करीब 10 महीने पहले इंस्पेक्टर विजिलेंस से मिलने गए थे। इसने वहां सिपाही अजीत से मिल कर बात करने को कहा। अजीत ने जांच को जल्दी निपटवाने के लिए प्रत्येक कर्मचारी से एक-एक लाख रुपये के हिसाब से रुपयों की मांग की।

बाद में 90 हजार रुपये के हिसाब से डील हुई। जिसके बाद हमने सिपाही अजीत को छह लाख 40 हजार रुपये इकट्ठे करके दिए। इसके बाद पांच मार्च को अजीत ने उन्हें छह लाख 40 हजार रुपये लौटा दिए। जांच के दौरान सामने आया कि इंस्पेक्टर अनिल व सिपाही अजीत द्वारा खरीदी गई भूमि कलेक्टर रेट पर खरीद की गई है तथा उक्त भूमि खरीद करने के संबंध में विभाग को सूचना दी गई। जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया। इस मामले में जांच करते हुए समिति के अधिकारियों व सिपाही अजीत सिंह की रिकार्डिंग की जांच की गई। इस मामले की जांच डीएसपी हेड क्वार्टर कर रहे हैं।

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