अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
शहर सिरसा पुलिस ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की शिकायत के आधार पर गेहूं घोटाले के आरोपी अधिकारियों और डिपो होल्डरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471, 120बी, 420, 409 के तहत मामला दर्ज किया है।
शिकायत में कहा गया है कि विभाग के अधिकारियों और डिपो होल्डरों ने मिलकर गबन किया। बताया गया कि वर्ष 2016 में दस हजार क्विंटल गेहूं अधिक दर्शाकर सरकारी खजाने को चपत लगाई गई है। इस मामले की जांच विभाग के डायरेक्टर केके बिश्नोई ने की थी और अधिकारियों और डिपो होल्डरों के खिलाफ एफआईआर की अनुशंसा की थी। सिरसा पुलिस ने शिकायत के आधार पर जगतपाल एएफएसओ, नरेंद्र सरदाना एएफएसओ, संजीव कुंडू इंस्पेक्टर, अशोक कुमार इंस्पेक्टर, सुनील कुमार इंस्पेक्टर, मनोज कुमार इंस्पेक्टर, रविंद्र कुमार सब इंस्पेक्टर, शमशेर सिंह सब इंस्पेक्टर, हंसराज भादू डीएफएससी सेवानिवृत्त, दीवानचंद शर्मा डीएफएससी सेवानिवृत्त, राजेश आर्य डीएफएससी, सुभाष सिहाग डीएफएससी सहित 58 डिपो होल्डरों के खिलाफ मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
अधिकारी लापता, फोन स्विच ऑफ
लाखों के गेहूं घोटाले का खुलासा होने और पुलिस विभाग द्वारा मामला दर्ज करने के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस की संभावित गिरफ्तारी के भय से आरोपी अधिकारी मंगलवार को अपने कार्यालयों से लापता रहे। विभाग में अधिकारियों की सीट खाली नजर आईं, जिसके कारण आम लोगों का कामकाज प्रभावित हुआ। नागरिक अस्पताल के निकट पीआर सेंटर में तो सन्नाटा पसरा रहा। राशनकार्ड से संबंधित कार्य के लिए आने वालों को निराश होकर लौटना पड़ा। यहां पर न तो एएफएसओ मिला और न ही कोई इंस्पेक्टर मिला।
बच गए कांफेड अधिकारी
निर्धारित मात्रा से अधिक मात्रा में गेहूं जारी करने वाली कांफेड के अधिकारी पूरे मामले में साफ बच निकले, जबकि गेहूं जारी करने का कार्य कांफेड द्वारा ही किया जाता है। बताया जाता है कि कांफेड अधिकारियों ने अपने बचाव में सबूत पेश किए कि उन्हें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने लिखित में आदेश दिए, इसलिए उन्होंने डिपो होल्डर को गेहूं जारी किया।