डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में 25 अगस्त के दिन सीबीआई कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद सिरसा में हुई हिंसा में उपद्रवियों की खतरनाक मंशा का एक और खुलासा हुआ है। सिरसा सदर पुलिस को डेरा सच्चा सौदा से सटे भारत नगर में एक सीवर से भारी मात्रा में कारतूस मिले हैं। ये कारतूस काले रंग के बैग में रखकर सीवर के मेनहोल में फेंके गए थे।
25 अगस्त को हजारों अनुयायी हाथों में हथियार और पेट्रोल बम लेकर सिरसा शहर को आग लगाने बढ़ रहे थे। सुरक्षा बलों ने इनको रोका तो उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने हवा में फायरिंग की तो उपद्रवी भाग खडे़ हुए। शुरुआती जांच में पुलिस का कहना है कि संभवत: सुरक्षा बलों पर फायरिंग करके भागे उपद्रवियों ने पकड़े जाने के डर से गोलियों को सीवर के होल में फेंक दिया और बंदूकें लेकर फरार हो गए। पुलिस को काले रंग के बैग में 32 कारतूस मिले हैं। इनमें से दो 12 बोर के कारतूस चले हुए हैं, यानि इन दो कारतूसों से ही जगदंबे पेपर मिल नाके पर सुरक्षा बलों पर फायरिंग की गई। कारतूसों में 13 कारतूस 32 बोर के हैं और 17 कारतूस 12 बोर के। पुलिस का कहना है कि इतनी मात्रा में कारतूसों को देखकर ही पता चलता है कि उपद्रवियों की मंशा कितनी खतरनाक थी। अगर पुलिस ने पुलिस और सुरक्षा बलों ने उपद्रवियाें को कड़ा जवाब नहीं दिया होता तो न जाने कितने निर्दोष लोग उपद्रवियों के हाथाें मारे जाते।
सीवर लाइन बंद होने से लगा पता
डेरा सच्चा सौदा के पास स्थित भारत नगर में प्रशासन की ओर से नई सीवरेज लाइन बिछाई गई है। लाइन पूरी बिछने के बाद गत दिवस इसे शुरू किया जा रहा था तो पानी आगे नहीं जाने लगा। भारत नगर निवासी गुरपाल सिंह और दौलत मसीह मेनहोल में जाकर सीवर सफाई का काम करने लगे। इस दौरान उनकी नजर पाइप में फंसे काले रंग के बैग पर पड़ी। इसी बैग के कारण पाइप जाम हो रखी थी। बैग को जैसे ही खोला गया उसमें काफी संख्या में कारतूस देखकर गुरपाल और दौलत मसीह के होश उड़ गए। तुरंत इसकी सूचना सदर थाना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और कारतूसों से भरे बैग को अपने कब्जे में ले लिया।
शहर की ओर बढ़ रहे थे पांच हजार डेरा प्रेमी
अदालत में हिंसा मामले को लेकर सौंपी चार्जशीट में सिरसा पुलिस ने हिंसा के संबंध में ब्यौरा दिया गया है कि 25 अगस्त को धारा 144 लागू थी। कीर्तिनगर चौकी इंचार्ज एएसआई अशोक कुमार जगदंबे पेपर मिल पर तैनात थे। तहसीलदार रविंद्र को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर नाके पर तैनात थे। सीबीआई कोर्ट ने डेरा मुखी को दोषी करार दिया तो शाम करीब पांच बजे हजारों डेरा प्रेमी आगजनी करते हुए नाके पर आ पहुंचे। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए डेरा प्रेमियों ने पुलिस पार्टी पर पथराव शुरू कर दिया। जिसमें सिपाही रमेश कुमार व हवलदार प्रहलाद को चोट आई। भीड़ में से कुछ व्यक्तियों ने जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग करने लगे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की, लेकिन उपद्रवियों की भीड़ तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मारने पर उतारू हो गई। फिर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेशानुसार मौजूद अधिकारियों ने डेरा प्रेमियों पर हवाई फायरिंग करवाई।
17 से 24 अगस्त तक डेरा में अनुयायियों को भड़का गया
हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों से पुलिस को पता चला कि डेरा मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य और हनीप्रीत ने डेरा में आयोजित मजलिसों में 17 से 24 अगस्त तक अनुयायियों को ये भाषण देती रही कि ‘यदि बाबा गुरमीत राम रहीम के खिलाफ अदालत का फैसला आया तो सभी अनुयायियों को चुप नहीं बैठना है। इस फैसले के विरोध में सरकार का जितना नुकसान कर करते हो करना, यदि जरूरत पडे़ तो सरकार के नुमाइंदों को और पुलिस वालों को जान से मारना पडे़ तो नहीं हिचकना है। सभी को अपनी जान देने और कुर्बानी के लिए तैयार रहना है’। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए डेरा अनुयायी प्रदीप कुमार निवासी प्रीत नगर और विजय कुमार निवासी माधोसिंघाना ने जांच के दौरान पुलिस को बताया कि बहन हनीप्रीत सहित डेरा प्रबंधन कमेटी के सदस्यों के भाषणों का अनुयायियों पर गहरा असर हुआ। 25 अगस्त को जैसे ही गुरमीत राम रहीम के खिलाफ सीबीआई अदालत का फैसला आया तो डेरा में मौजूद हजारों अनुयायियों ने अपने हाथों में हथियार और पेट्रोल बम ले लिए। काफी लोगों ने हाथों में पत्थर ले लिए। भड़के अनुयायियों ने बेगू गांव स्थित बिजली घर में पेट्रोल बम फेंककर आग लगा दी।
अनुयायियों ने ठिकाने लगाया डेरा में रखा करोड़ों रुपया
पुलिस की चार्जशीट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डेरा मुखी के खिलाफ फैसला आने के बाद 26 से 28 अगस्त के बीच अनुयायियों ने ही डेरा में पड़ा काफी रुपया व आपत्तिजनक सामान गायब किया। हनीप्रीत और डेरा प्रबंधन कमेटी के सदस्यों ने पहले से ही अपने खास अनुयायियों को यह निर्देश दे दिया था कि अगर फैसला खिलाफ आता है तो इसके बाद इस काम को सही ढंग से अंजाम देना है। डेरा अनुयायियों ने डेरा के कट्टर समर्थकों के घर-घर जाकर संपर्क करके डेरा सच्चा सौदा में पड़ा करोड़ों रुपया व आपत्तिजनक सामान समर्थकों के हवाले कर दिया।
असल दोषी का जल्द लगेगा पता
शुरुआती जांच में ऐसा लगता है कि हिंसा के दिन दंगा विरोधी कार्रवाई से भयभीत होकर सुरक्षा बलों पर फायरिंग करने वाले उपद्रवी ने भगते हुए कारतूसों को बैग में डालकर सीवर में फेंक दिया। मामले की तह तक जांच की जाएगी। कारतूसों पर निर्माता कंपनी का नाम व संख्या नंबर अंकित है। कंपनी की ओर से इस संख्या के कारतूसों की खेप किस विक्रेता को भेजी गई और विक्रेता ने किस असला धारक को ये कारतूस बेचे इसका पता लगाकर असल उपद्रवियों तक पहुंचा जाएगा। फिलहाल अज्ञात शख्स के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज करके मामले की जांच शुरू की गई है।
-इंस्पेक्टर दिनेश कुमार, इंचार्ज सदर थाना सिरसा।