पूर्व चेयरपर्सन शीला सहगल ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ कोर्ट में दायर की याचिका
कोर्ट ने यथास्थित बरकरार रखने के दिए आदेश
सिरसा। सिरसा नगरपरिषद की पूर्व प्रधान शीला सहगल ने अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को चैलेंज किया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने नए चेयरपर्सन के चुनाव पर रोक लगाते हुए यथा स्थिति बरकरार रखने के निर्देश प्रशासन को दिए है। अब मामले की अगली पेशी दस दिसंबर को है। ऐसे में जब तक मामले का पटाक्षेप नहीं होता सिरसा नगरपरिषद के चेयरपर्सन का चुनाव नहीं हो पाएगा। नए चेयरपर्सन के लिए चुनाव 27 नवंबर को हुआ था। लेकिन मतदान में कोरम पूरा न होने पर प्रशासन ने चुनाव रद्द कर दिया था। पूर्व प्रधान शीला सहगल ने 17 नवंबर को अपने वकील के माध्यम से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करके अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को चैलेंज करते हुए याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इस संबंध में प्रशासन को नोटिस जारी किया, लेकिन प्रशासन के पास एक दिसंबर को नोटिस मिला। तब प्रशासन ने कोर्ट से जवाब दायर करने के लिए दस दिन का समय मांगा। कोर्ट में अब अगली सुनवाई दस दिसंबर को है। इससे पहले 27 नवंबर को नए चेयरपर्सन का चुनाव कोरम पूरा न होने के चलते रद्द हो गया था। हालांकि शीला सहगल के खिलाफ एक अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पास हुआ था। लेकिन उन्होंने इस अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगाने के लिए जुलाई 2018 में याचिका पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की थी। लेकिन उस समय कोर्ट ने इसे प्री मेच्योर कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी। तब पूर्व चेयरपर्सन शीला सहगल ने 17 नवंबर 2018 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दोबारा याचिका दायर की और अपने खिलाफ एक अगस्त 2018 को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को चैलेंज किया। कोर्ट में अब मामले की सुनवाई 10 दिसंबर को है।
ये था पूरा मामला
पूर्व चेयरपर्सन शीला सहगल भाजपा नेता राहुल सेतिया गुट की थी। उन्होंने आठ महीने तक चेयरपर्सन का पद संभाला। जुलाई 2018 में उनके खिलाफ 22 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव ला दिया। इन 22 पार्षदों में से नौ भाजपा के, पांच कांग्रेस के, पांच हलोपा के, तीन निर्दलीय उम्मीदवार थे। प्रशासन ने मतदान का दिन एक अगस्त 2018 तय किया। इस दिन 22 पार्षदों ने शीला सहगल की सरकार के खिलाफ वोटिंग की। नगरपरिषद के उप प्रधान रणधीर सिंह को कार्यकारी प्रधान का चार्ज मिल गया। शीला सहगल की कुर्सी जाने के बाद कुछ पार्षदों ने प्रशासन से चेयरपर्सन का चुनाव करवाने के लिए कहा। करीब चार माह बाद प्रशासन ने 27 नवंबर को नए चेयरपर्सन के लिए वोटिंग करवाने ोे तिथि तय की। लेकिन 27 नवंबर को वोटिंग के लिए 22 पार्षदों का गुट अपने में से किसी एक नाम पर सहमति न बनने पर अमृतसर चला गया। मतदान के लिए 31 पार्षदों में से केवल चार ही पार्षद पहुंचे। 22 पार्षदों के गुट से कोई वोटिंग करने नहीं पहुंचा और न ही एमपी, एमलए वोटिंग करने आए। 33 वोटरों में से चेयरपर्सन के चुनाव के लिए 17 पार्षदों का कोरम पूरा होना जरूरी था। प्रशासन ने कुल 33 मतदाताओं के लिए बैठने की व्यवस्था की थी। एसडीएम कम रिटर्निंग अधिकारी राहुल हुड्डा ने कोरम पूरा न होने पर मतदान स्थगित कर दिया।
अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले ये थे 22 पार्षद
वार्ड एक से राजेंद्र, दो से सुनीता, वार्ड तीन से सुनील बहल, वार्ड चार से रणधीर सिंह, वार्ड पांच से सुमन शर्मा, वार्ड सात से मनोज मकानी, वार्ड दस से रेखा सुखरालिया, वार्ड 11 से जश्न इंसा, वार्ड 12 से नारायण सिंह, वार्ड 14 से सुदेश कुमारी, वार्ड 17 से रीना सेठी, वार्ड 18 से रेणु बाला, वार्ड 19 से नीतू सोनी, वार्ड 21 से रोहताश वर्मा, वार्ड 22 से बलजीत कौर, वार्ड 23 से राजेश गुज्जर, वार्ड 26 से ख्याली राम, वार्ड 27 से महाबीर सिंह, वार्ड 28 से सुमनलता, वार्ड 29 से ज्ञान देवी, वार्ड 30 से रेणु बाला, वार्ड 31 से आशा रानी ने अविश्वास प्रस्ताव में वोटिंग की थी।
कोट्स
चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया है। कोर्ट ने यथास्थित को बरकरार रखने के आदेश दिए है। अगली सुनवाई दस दिसंबर है, इस पर प्रशासन अपना जवाब दायर करेगा।
राहुल हुड्डा, एसडीएम, सिरसा।
कोट्स
हमने अविश्वास प्रस्ताव को चैलेंज किया है। अब अगली सुनवाई पर ही प्रशासन अपना जवाब दायर करेगा।
प्रेम सहगल, प्रतिनिधि, पूर्व चेयरपर्सन शीला सहगल।