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डीसी से सीएम विंडो पर आई शिकायत की जांच में एडीसी को माना दोषी, एडीसी बोले जूनियर अधिकारी एसडीएम से करवाई जांच, निष्प्क्ष नहीं

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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। गांव पन्नीवाला मोटा के धर्मपाल ने सीएम विंडो पर एडीसी मुनीष नागपाल पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए है। यह जांच डीसी प्रभजोत सिंह ने की। उन्होंने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) में एडीसी पर लगे आरोपों को सही पाया। क्योंकि एडीसी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा नहीं।
ये है मामला: गांव पन्नीवाला मोटा में हैफेड गोदाम नंबर-2 को जाने वाले रास्ता में डी-प्लान के तहत पाइप लाइन डाली गई, जिसमें भारी धांधली की गई। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की और गांव पन्नीवाला मोटा निवासी धर्मपाल पुत्र रणजीत सिंह ने सीएम विंडो खटखटाई और पूरे मामले को उजागर किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि डी-प्लान की राशि को खुर्दबुर्द किया गया। डी-प्लान के तहत होने वाले कार्य अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से होते है।
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शिकायतकर्ता धर्मपाल ने अपने बयान में बताया कि गैर-कानूनी रूप से डाली गई पाइप लाइन के मामले में एडीसी ने उन्हें 13 अप्रैल 2018 को बुलाया था, लेकिन वह नहीं जा पाया। उसका भाई विक्रम और भतीजे इंद्रपाल और प्रमोद एडीसी के पास पहुंचे। एडीसी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। विक्रम ने अपने ब्यान में बताया कि एडीसी डॉ. मुनीष नागपाल ने इस आशय की स्वीकारोक्ति की कि पाइप लाइन गैर कानूनी रूप से डाली गई है। इसी दौरान एडीसी ने कॉल आने पर उसका मोबाइल छीन लिया और उन्हें बंधक बना लिया। उन पर एफआईआर दर्ज करवाने की धमकी दी। बाद में अधिवक्ता के हस्तक्षेप के बाद उन्हें कक्ष से देर शाम जाने दिया। धर्मपाल ने बताया कि 19 अप्रैल को उसके पिता को मोबाइल सौंपा गया। जिसमें मैमोरी कार्ड नहीं था और मोबाइल का लॉक भी टूटा हुआ था। मोबाइल में उनकी पारिवारिक फोटो है, जिन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी गई है।
जांच में एडीसी ने नया मैमोरी कार्ड देने की बात कहीं
उपायुक्त द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट में अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा अपना पक्ष रखा गया। एटीआर में उपायुक्त द्वारा लिखा गया है कि एडीसी ने आरोपों का खण्डन नहीं किया है। उन्होंने मैमोरी कार्ड लौटाने से इंकार किया है। चूंकि मैमोरी कार्ड से डाटा रिकवर किया जा सकता है। एडीसी की ओर से शिकायतकर्ता को नया मैमोरी कार्ड देने की पेशकश की गई है। उपायुक्त ने टिप्पणी कि है कि एडीसी स्तर के अधिकारी का किसी का मोबाइल छीनना और उसका मैमोरी कार्ड निकाल लेना उनके जैसे अधिकारी को शोभा नहीं देता। इससे जनता के बीच सरकार की छवि खराब होती है। यदि शिकायतकर्ताओं से किसी प्रकार की शिकायत थी तो एडीसी को तुरंत पुलिस को बुलाना चाहिए था, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए थी। लेकिन एडीसी ने न पुलिस को बुलाया और न ही पुलिस में उनके खिलाफ शिकायत ही दर्ज करवाई। उपायुक्त द्वारा मामले की जांच को लेकर 11 जून 2018 को दोनों पक्षों को बुलाया गया। एडीसी ने घरेलू कार्य की व्यवस्तता बताई, जिसके कारण सुनवाई की तिथि 20 जून निश्चित की गई। इस दिन शिकायतकर्ता तो पहुंचे लेकिन एडीसी की ओर से ई-मेल पहुंची और वे नहीं आए। फिर सुनवाई की तिथि 22 जून निर्धारित की गई। शिकायतकर्ता आए लेकिन एडीसी का मेडिकल अवकाश पत्र ई-मेल से आया। अगली तारीख 29 जून निर्धारित की गई। शिकायतकर्ता आए लेकिन एडीसी का फिर से मेडिकल आया। एक बार फिर सुनवाई की तिथि 5 जुलाई निर्धारित की गई। शिकायतकर्ता तो आए लेकिन एडीसी नहीं आए, उन्होंने 11 जुलाई तक का मेडिकल अवकाश दे दिया। जबकि एडीसी की ओर से दिए जवाब की क्रास एक्जामिनेशन में एडीसी ने मैमोरी कार्ड अपने पास रखने से इंकार नहीं किया। बल्कि उन्होंने नया मैमोरी कार्ड देने का प्रस्ताव किया।
एडीसी के पास मौजूद थे विकल्प
उपायुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट में मेमोरी कार्ड को छीनने को गंभीर माना है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एडीसी के पास मेमोरीकार्ड छीनने के अलावा अन्य भी विकल्प मौजूद थे। वे अनाधिकृत रूप से की गई वीडियोग्राफी को डिलीट करवा सकते थे। इसके अलावा एडीसी सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने और बिना अनुमति के वीडियो बनाने पर आईटी एक्ट के तहत मामला भी दर्ज करवा सकते थे। लेकिन एडीसी ने मोबाइल छीनकर और बाद में उसका मैमोरी कार्ड अपने पास रखकर अनुचित किया, जोकि उनके स्तर के अधिकारी को शोभा नहीं देता। अत एडीसी के इस कार्य से सरकारी की छवि खराब हुई है।
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पाइप का मामला न्यायालय में विचारधीन है। मेरे पर दुर्व्यवहार करने के आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है। मेरे कार्यालय में आकर शिकायत कर्ताओं ने हल्ला किया और रिकार्डिंग करनी शुरू कर दी। मैं एफआईआर करवाने लगा तो शिकायतकर्ता माफी मांगने लगे। माफीनामा देने पर मोबाइल वापस दिया। इसी बीच इन्होंने इसकी शिकायत सीएम विंडो पर डाल दी। इस मामले की आधी जांच एसडीएम ने की। जो कि उनके जूनियर अधिकारी है। मैंने जांच अधिकारी बदलने के लिए मुख्य सचिव को लिखा, ताकि जांच अधिकारी निष्पक्ष हो। इसी दौरान मैं मेडिकल लीव पर चला गया। लेकिन मेडिकल लीव के दौरान आठ जून को शिकायत कर्ताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें इस संबंध में कोई नोटिस नहीं दिया गया। बिना नोटिस दिए ही शिकायत कर्ताओं के बयान दर्ज किए गए। इसलिए मैंने सीएम ग्रीवेंस सैल के ध्यान में ये मामला लाया है।
मुनीष नागपाल, एडीसी सिरसा।
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