अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। बिना जांच रिपोर्ट आए एफआईआर रद्द करने और दस्तावेजों से छेड़छाड़ करके न्यायालय को गुमराह करने के मामले में सिरसा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता सहित पांच पुलिस अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उक्त अधिकारियों को 14 सितंबर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था लेकिन ये पेश नहीं हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने पांचों अधिकारियों को नोटिस जारी करके 15 दिसंबर 2018 को तलब किया है।
45 लाख रुपये की धोखाधड़ी के इस मामले में कोर्ट के निर्देश पर सदर थाना पुलिस ने 4 दिसंबर 2015 को विदेशी कंपनी क्राउन क्रेडिट कॉपरेशन सोसायटी लिमिटेड के एमडी सहित पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की और केस रद्द कर दिया। जस्टिस एमएमएस बेदी ने सिरसा पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि नामजद आरोपियों पर दो माह के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपी जाए। सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी एवं मौजूदा समय में डीएसपी दलीप सिंह, डीएसपी हेड क्वार्टर विजय कक्कड़ ने कोर्ट में लिखित रूप में जो बयान दिए उसमें काफी अंतर सामने आ गया। कोर्ट ने साइनों की रिपोर्ट मधुबन से मांगी थी उसमें जवाब आया है कि एस अक्षर से छेड़छाड़ की गई है और वो साफ नहीं दिखाई दे रहा। कोर्ट ने सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार से पूछा कि जब कोर्ट से पुलिस ने साइन वाले दस्तावेज लिए उसमें साइन बिलकुल साफ हैं ऐसे में छेड़छाड़ कैसे हुई। सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार के दाखिल जवाब से अदालत सहमत नहीं हुई। इसके बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पीड़ित की याचिका व पुलिस की ओर से दाखिल किए जवाब पर कड़ा संज्ञान लेते हुए तत्कालीन एसपी सतेंद्र गुप्ता, तत्कालीन एएसपी विजय कक्कड़, डीएसपी दलीप सिंह, तत्कालीन सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार व एएसआई रामकुमार को नोटिस जारी करके 15 दिसंबर को तलब किया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में उक्त अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने का निर्देश दिया है।
ये है पूरा मामला
विदेशी कंपनी क्राउन क्रेडिट कॉपरेशन सोसायटी लिमिटेड की पंजाब के अमृतसर जिले के तरनतारन रोड पर दफ्तर है। साल 2011 में गांव सिकंदरपुर निवासी किसान शमशेर को उसके परिचित रोपड़ निवासी राकेश वर्मा ने बताया कि उक्त कंपनी चार सालों में रुपया डबल करके लोगों को देती है और बैंक आठ से दस साल में एफडी के नाम पर रुपया दोगुना करके देते हैं। किसान शमशेर सिंह ने कंपनी कार्यालय में जाकर कंपनी के एमडी अमरीक सिंह से संपर्क किया और कंपनी की योजनाओं के संबंध में पूछा। अमृतसर निवासी एमडी अमरीक सिंह ने किसान शमशेर सिंह को बताया कि कंपनी चार साल में रुपया दोगुना करके देती है। शमशेर सिंह ने एमडी के बातों पर विश्वास करके 45 लाख रुपये का निवेश कंपनी में कर दिया। अप्रैल 2015 में पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर किसान शमशेर सिंह कंपनी कार्यालय में अपने 90 लाख रुपये लेने पहुंचा। कंपनी के अधिकारी रुपया देने में टालमटोल करने लगे। कुछ दिनों तक शमशेर सिंह ने इंतजार किया और फिर कंपनी के दफ्तर में जाकर अपने रुपये मांगे। वहां उसे पता चला की कंपनी शाखा का एमडी लापता हो गया है। किसान शमशेर सिंह को खुद के साथ धोखाधड़ी का अहसास हो गया। उसने पुलिस थाने जाकर कंपनी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद शमशेर सिंह ने एसीजेएम पवन कुमार की अदालत में याचिका दायर करके न्याय की गुहार लगाई। अदालत ने फैसला सुनाते हुए पुलिस को कंपनी के एमडी अमृतसर निवासी जगजीत सिंह, अमरीक सिंह, रोपड़ निवासी बलजीत सिंह, मोहाली निवासी रजनीश कपूर व रोपड़ निवासी राकेश वर्मा के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने आरोपियों पर केस दर्ज करने के बाद बिना जांच किए एफआईआर रद्द कर दी।