कालांवाली। जनस्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते शहर कालांवाली की जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शहर के 15 वार्डों की हर गली-मोहल्ले में दूषित व शोरायुक्त पेयजल की सप्लाई की जा रही है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में ना तो सप्लाई होने वाले पानी के कोई सैंपल लिए जाते हैं, ना ही पानी का टीडीएस लेवल जांचा जा रहा है।
विभाग केवल खानापूर्ति करता नजर आता है। नतीजा यह हो रहा है कि दूषित व फ्लोराइडयुक्त पेयजल सप्लाई से आमजन को हड्डियों के कमजोर होने, बाल झड़ने, जोड़ों व घुटने और कमर दर्द रहने, चमड़ी और पेट से संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ में घरों के नलों, पाइपों, कूलरों, आरओ आदि के खराब होने के चलते आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। शहरवासियों संजय सैन, मास्टर परमानंद, संदीप जैन, मंगत राय, गोरा सिंह, रमेश कुमार व अन्यों ने सरकार व प्रशासन से नहरी पानी की मांग करते हुए बताया कि उक्त समस्या के बारे में कई बार सरकार व उच्चाधिकारियों को अवगत करवा चुके। लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बरकरार है।
जलघर की डिग्गियों में गंदगी की भरमार
शहर के जलघर में लगभग 4 बड़ी पानी की डिग्गियां बनी हुई हैं। जिनमें भाखड़ा नहर से आने वाला पानी जमा करके शहर में सप्लाई किया जाता है। इन पानी डिग्गियों की हालत काफी गंभीर बनी हुई है। इन डिग्गियों में कई सालों से सफाई नहीं करवाई गई है और ना ही रिपेयर करवाई गई है। जिसके चलते इन डिग्गियों में पाॅलीथिन, कचरा, फफूंदी भारी मात्रा में जमा है, जोकि भयानक बीमारियां फैला रहा है।
कई जगह से टूटी है पेयजल पाइप लाइन
बता दें कि शहर कालांवाली के कुल 15 वार्डोें में लगभग 30,000 की जनसंख्या है। इन वार्डो ही गलियों व मुख्य बाजारों में करीब 25 वर्ष से अधिक पुरानी पेयजल लाइन बिछी हुई है। जोकि वर्तमान में काफी खस्ता हाल में है। पेयजल पाइप लाइन जगह-जगह से टूटी हुई है। टूटी पेयजल पाइप लाइन के चलते सीवरेज का पानी मिक्स होकर शहर में सप्लाई हो रहा है। इसके अलावा करीब भाखड़ा नहर से शहर के जलघर में आने वाली पेयजल पाइप लाइन जगह-जगह से टूटी हुई है।
क्या होता है फ्लोराइड युक्त पानी
फ्लोराइड युक्त पानी बाल्टी में पानी निकालने के थोड़ी देर बाद रंग बदल देता है। जिस बाल्टी में पानी रखा जाता है। उस बाल्टी की सतह व किनारा जहां तक पानी रहता ह,। वहां तक बाल्टी का रंग पीला हो जाता है। अगर आप किसी बर्तन में पानी गरम करते है तो साइड में जमा होने वाली सफेद परत इसी का रूप है। इसके अलावा बिना दूध की चाय, काला नमक, तंबाकू, सुपारी व फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से भी फ्लोरोसिस होने का खतरा रहता है।
एक्सपर्ट पैनलः- 250 से अधिक टीडीएस शरीर के लिए है धीमा जहर
पेयजल में 250 से अधिक टीडीएस शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसा फ्लोराइड युक्त पानी अगर कोई लंबे समय तक पीता है तो उसे फ्लोरोसिस नाम की बीमारी हो जाती है। साथ में पेट, लीवर, चमड़ी, मांसपेशियां व हड्डियां कमजोर होने, दांत खराब होने, जोड़ों व घुटने दर्द होने के अलावा अनेक भयानक बीमारियां हो सकती है। इसलिए यदि आरो है तो टीडीएस 150 से कम और 250 से ज्यादा ना हो। - डाॅ संजीव सिंगला, सिंगला आयुर्वेदिक अस्पताल कालांवाली
हेड आफिस की तरफ से एस्टीमेट पास हो चुका है
हमने समस्याओं के समाधान के लिए प्रपोजल बनाकर हेड आफिस को भेजा था। हेड आफिस की तरफ से एस्टीमेट पास हो चुका है। अमृत योजना के तहत शहर में पेयजल समस्या का समाधान करवाया जाएगा। अभी हेड आफिस की तरफ से काॅपी आनी बाकी है। जल्द ही शहर की पेयजल समस्या को दूर करवाकर आमजन को राहत पहुंचाई जाएगी। -विजय कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग डबवाली।