सिरसा। चुनाव लड़ने वाले लोकसभा प्रत्याशी आज जहां प्रचार और वोटरों का विश्वास जीतने पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, वहीं एक समय ऐसा था कि समर्थक अपने खर्च पर प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाते और जीताते थे। तब वोटरों का विश्वास हासिल करने के लिए प्रत्याशी को न झूठे प्रलोभन की जरूरत पड़ती थी न पैसे खर्च करने की।
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी दलबीर सिंह भी ऐसे ही नेताओं में शुमार थे, जिनका चुनाव खर्च नहीं के बराबर होता था। प्रचार से लेकर अतिथियों के आवभगत तक का खर्च समर्थक और करीबी खुद ही उठाते थे। 5 मार्च 1936 को हिसार के गांव प्रभुवाला में जन्मे चौधरी दलबीर सिंह की सादगी और उनसे जुड़े किस्से समर्थकों को आज भी याद आते हैं।
बकरियावालां के पूर्व सरपंच लाधुराम पूनियां ने बताते हैं कि चौधरी दलबीर सिंह आज भी सिरसा के लोगों के दिलों में जिंदा हैं। वे कार्यकर्ताओं को चिट्ठी भेजकर अवगत कराते थे कि उनका काम हुआ या नहीं हुआ। जिस कार्यकर्ता के पास उनकी चिट्ठी आती थी, उनका मुरीद हो जाता था। सालों तक उनकी भेजी चिट्ठी को संभालकर रखता था। वह लोगों से प्रेमभाव से मिलते थे और उनकी बातों को सुनते थे। कार्यकर्ताओं को दिल्ली से चिट्ठी भेजकर वह हालचाल जरूर पूछते थे। समर्थक बताते हैं कि कार्यकर्ताओं से मिलने का उनका अपना अलग अंदाज था। उनका एक ही जगह चाय और खाने का प्रोग्राम होता था।
कांग्रेस नेत्री कुमारी सैलजा बताती है कि चौ. दलबीर सिंह का जिस समय जन्म हुआ उस समय पंजाब व हरियाणा का क्षेत्र संयुक्त पंजाब कहलाता था। उन्होंने पंजाब से अलग होते हरियाणा को बड़े करीब से देखा और बदलते राजनीतिक परिदृश्य को भी समझा। दलबीर सिंह पर शुरू से ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पंडित जवाहरलाल नेहरू का काफी प्रभाव रहा। वे गांधीवादी विचारधारा व पंडित नेहरू की विचारधारा का अनुसरण करने लगे। उन्होंने इन विचारधाराओं का समन्वय अपने राजनीतिक जीवन में भी बखूबी किया।
सिरसा से ही चुनकर जाते थे लोकसभा
चौधरी दलबीर सिंह 1967 में सिरसा से आम चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे। उनका कार्यकर्ताओं से काफी जुड़ाव था। 1972 में वे दूसरी बार जीतरक लोकसभा पहुंचे लेकिन 1977 की जनता दल की लहर में उनको हार का सामना करना पड़ा। तीन साल बाद ही 1980 में फिर चुनाव हुआ है और दलबीर सिंह सांसद बन गए। वे सभी चुनाव सिरसा से ही लड़े। जानकारों के अनुसार सिरसा में 1984 में पहला एसटीडी टेलीफोन एक्सचेंज वहीं लाए थे। जब चौधरी दलबीर सिंह सिंचाई मंत्री थे तो उन्होंने भाखड़ा नहर का निर्माण करवाया था। बाद में कुमारी सैलजा ने उनके नाम चौधरी दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम भी बनवाया।