सिरसा के महिला कॉलेज में परीक्षा देतीं आशा वर्कर।
सिरसा। जिले में आशा वर्कर की प्रतिभा जांचने के लिए रविवार को लिखित परीक्षा हुई। परीक्षा में जिलेभर से 500 आशा वर्कर ने भाग लिया, जबकि 400 आशा वर्कर विभिन्न कारणों से वंचित रह गईं। पेपर देकर केंद्र से बाहर आई आशा वर्कर्स ने कहा कि पेपर तो आसान था लेकिन इसके पीछे सरकार का मकसद समझ नहीं आया।
परीक्षा को लेकर राजकीय महिला महाविद्यालय के अतिरिक्त विभिन्न सरकारी शिक्षण संस्थानों को केंद्र बनाया गया था। सरकार की ओर से 30 अंक का पेपर आशाओं के कार्यों और प्रतिभा को परखने के लिए बनाया गया था। 30 नंबर के पेपर के लिए 90 मिनट का समय दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले भर में 900 आशा वर्कर हैं। जिले में ग्राउंड स्तर पर काम करती है। सरकार की ओर से सभी आशा वर्कर की योग्यता को परखने के लिए यह परीक्षा करवाई जा रही है। जिले की 900 आशाओं में 500 आशा वर्कर ही पेपर में उपस्थिति दर्ज करवा पाई।
आशा वर्कर्स बोलीं - शिशु की देखभाल, खानपान आदि के बारे में थे प्रश्न
बरनाला रोड स्थित महिला कॉलेज से पेपर देकर बाहर आई आशा वर्कर पिंकी ने बताया कि पेपर सामान्य था। इसमें आशा वर्कर्स के होने वाले कार्यों, शिशु की देखभाल, खानपान, परिवार नियाेजन, आहार आदि के बारे में पूछा गया था। आशा वर्कर यूनियन की जिला सचिव शिमला ने बताया कि पेपर तो सामान्य ही था। सरकार का पेपर लेने का मकसद हमारी समझ में नहीं आया।
पेपर देकर खुशी आज खुशी हुई। पेपर में आशाओं के काम से जुड़े हुए ही सवाल थे। इसमें जागरूकता को लेकर ही सवाल किए गए थे। सरकार की ओर से पहले दो प्रेक्टिकल लिए गए थे। जो 40 और 30 अंकों के थे। सरकार का क्या प्लान है, कुछ समझ नहीं आ रहा है। - दर्शना देवी, जिला प्रधान, आशा वर्कर एसोसिएशन।