सिरसा। पटवारी एवं कानूनगो की हड़ताल से सरकारी तंत्र से लेकर आमजन प्रभावित हैं। हड़ताल से 27 दिनों में सरकार को करीब 80 करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिल पाया। वहीं करीब 1200 रजिस्ट्री व इंतकाल के काम कई दिनों से रुके हुए हैं। इस कारण आमजन और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पटवारियों से जुड़े छोटे-छोटे कार्य भी आमजन के नहीं हो रहे हैं।
तीन जनवरी से लेकर पटवारी व कानूनगो हड़ताल पर हैं। पटवार खाने पर ताला लगा हुआ है। सर्द मौसम में पटवारी और कानूनगो धरना दे रहे हैं, जिससे लोगों का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं, सरकारी सर्वे का कार्य भी पटवारियों के चलते प्रभावित हो रहा है। बता दें कि जिले में पांच तहसील है और हर तहसील में जमीन-जायदाद से संबंधित कार्य पूरी तरह ठप है। किसी को बैंक से केसीसी बनवाने के लिए जमाबंदी की जरूरत पड़ रही है तो किसी को बच्चों के स्कूल कार्य के लिए जाति प्रमाण पत्र व रिहायशी प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। सभी कार्य पूरी तरह से अटक गए हैं।
वहीं एसोसिएशन के जिला प्रधान लाभ सिंह ने बताया कि उनकी मांगे जायज हैं, लेकिन सरकार ही देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि हम अपने हक के लिए जितना भी संघर्ष करना पड़ेगा हम करेंगे। राज्य कमेटी की और से आगामी दिनों में जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे उसी आधार पर रणनीति तैयारी की जाएगी। जिला प्रधान ने कहा कि किसान व आमजन को इस हड़ताल के चलते परेशान हो रही है। इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन हम भी मजबूर हैं और अपने हक के लिए आज नहीं तो कल लड़ना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस कड़ाके की ठंड में जहां लोग बाहर निकलने से कतराते रहते हैं उसी ठंड व सर्दी में हम पिछले 27 दिनों से बैठे हुए हैं।
करोड़ों का राजस्व अटका
जिला की सभी तहसीलों से सरकार को प्रतिदिन 2 से 3 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। जिले में 5 तहसील है। सिरसा का छोड़ सभी तहसीलों में करीबन 40 लाख रुपये जमीन की रजिस्ट्री व इंतकाल की फीस के रूप में एकत्रित होते हैं। इसके अलावा इंतकाल की फर्द, जमाबंदी व खसरा गिरदावरी की फर्द निकलवाने के दौरान भी सरकारी फीस किसान भरते हैं। इस प्रकार सरकार को सरकारी खजाने में करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता रहता है।
पटवारियों की हड़ताल से नहीं बनी केसीसी
गांव बकरियांवाली निवासी विक्रम कुमार ने बताया कि उसे बैंक से केसीसी बनवानी थी। ताकि निजी तौर पर किसी से लिया कर्ज चुकाया जा सके। लेकिन जब बैंक में फर्द लेकर गया तो अधिकारियों ने पटवारी की तस्दीक के बिना मना कर दिया। एक माह से फर्द पर पटवारी से सत्यापन करवाने का इंतजार कर रहा हूं।
केसीसी बनती तो बेटी की शादी में होता सहयोग
गांव रूपावास निवासी गुरलाल ने बताया कि उसे अगले माह बेटी की शादी करनी है और पैसे की जरूरत है। निजी तौर पर कोई कर्ज देता नहीं और देता भी है तो मनमर्जी का ब्याज देना पड़ेगा। ऐसे में सोचा केसीसी बनवा लूं, लेकिन एक माह से भटक रहा हूं और बैंक वाले बिना पटवारी के तस्दीक किए केसीसी नहीं बना रहे हैं।