ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को गीता एन अपीटोम ऑफ पीस, फ्रेटरनिटी एंड हारमोनी विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें संत महात्माओं ने बताया कि गीता के उपदेश में इंसान की जिंदगी का हर रहस्य और समाधान छिपा है।
ऑस्ट्रेलिया में सिडनी के डार्लिंग हार्बर थियेटर में सेमिनार के दौरान प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज ने मुख्य रूप से संबोधित किया, जबकि गुरु शरणानंद महाराज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद सहित अन्य संतों ने गीता के उपदेश की प्रासंगिकता पर चर्चा की। गृहमंत्री ने कहा कि लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, जो आज भी मानव के लिए प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि सारे विश्व में धर्म पर चर्चा होती है, लेकिन धर्म तीन अक्षरों का शब्द है यानी ऐसा रास्ता धारण करना, जो मुक्ति दिला दे, मंजिल दिला दे, मोक्ष दिला दे। अगर इस फॉर्मूले पर गीता को परखा जाए तो इनमें सारे गुण हैं। यह जीवन में आपकी जो मंजिल है उसको दिला सकता है और अगर आप मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं तो भी दिला सकता है।
इसमें ज्ञान योग, भक्ति योग, संख्या योग, कर्म योग के अलावा अन्य योगों का भी उल्लेख किया गया है। हर आदमी के संस्कार, गुण, धर्म अलग-अलग होते हैं जिस रास्ते को वह अपनाना चाहे, वह रास्ता अपना सकता है, लेकिन गीता में सभी रास्तों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
दुनिया के कोने-कोने तक गीता के प्रचार-प्रसार पर जोर
गृहमंत्री ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि गीता का ज्ञान हरियाणा की धरती पर धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में दिया गया। इसलिए हरियाणा सरकार और हमारा दायित्व बनता है कि जो ज्ञान हमारी धरती पर दिया गया है, उसका प्रचार प्रसार दुनिया के कोने कोने तक पहुंचाया जाए।