रोहतक। महिलाओं को अपने आप को पहचानने की जरूरत है। वह अब समानता से भी कहीं आगे निकल चुकी हैं। इस वर्ग को अपना हर दिन समानता के साथ ही बिताना चाहिए। क्योंकि हर घर में दिन की शुरूआत महिलाओं के प्रबंधन से ही होती है। चांद पर चंद्रयान-3 की सफलता में महिला वैज्ञानिकों के योगदान ने साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं हैं। महिलाओं को भी अपने आप को किसी से कम नहीं आंकना चाहिए। यह बात शनिवार को आईएमटी स्थित अमर उजाला के कार्यालय में अपराजिता कार्यक्रम के तहत छात्राओं व महिलाओं ने अपने विचार साझा करते हुए कही।
अभिनेत्री, कवयित्री एवं मिस हरियाणा 2016 अंजवी हुड्डा ने समानता दिवस पर कहा कि महिलाओं को समानता दिवस की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए। महिलाएं आज के समय में समानता से कहीं आगे है। यह सिर्फ हर किसी का सोचने समझने और देखने का नजरिया है। महिलाओं को हमेशा ही समानता से आगे बढ़कर सोचना होगा। महिला अपने आप को किसी से कम न आंके। वह अपने आप में ही सशक्त हैं उन्हें सिर्फ इसे पहचानने की जरूरत है। चंद्रयान तीन की सफलता से विदेशी कंपनियों को देश में इन्वेस्ट करने की होड़ लगेगी। वह देश के युवाओं की काबिलियत को ध्यान में रखकर इन्वेस्ट करेंगी। इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद युवा भी वैज्ञानिकों से प्रेरित होंगे और इस दिशा में बेहतर कार्य करेंगे।
जब आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं, तब सिर्फ एक आदमी ही शिक्षित होता है। लेकिन जब आप एक स्त्री को शिक्षित करते हैं तो उससे पूरी पीढ़ी शिक्षित होती है। हर लड़की को समानता का अधिकार देना चाहिए। बेटे के सामान हर बेटी को प्यार करना चाहिए।
- स्वीटी भारती, प्रिंसिपल, गर्वमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल घडावठी
जब तक महिलाएं अपने अंदर की शक्ति को नहीं पहंचानेगी वह सशक्त कैसे बनेंगी। उन्हें समाज व अपने आसपास की जरूरी बातों का ज्ञान भी जरूर होना चाहिए। ताकि वह अपने आसपास की महिला व लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें।
- ऊषा कौशिक, सेवानिवृत्त अध्यापक
औरत होना किसी भी मायने में आसान नहीं है। आपको पहले अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। फिर साबित करना पड़ता है कि आप सही हो। कहीं न कहीं आज भी महिलाओं को जागरूकता की जरूरत है।
- डॉ. सीमा वर्मा
कुछ लोगों द्वारा कहा जाता है कि औरत का कोई घर नहीं होता। लेकिन उन्हें समझने की जरूरत है कि औरत के बिना कोई घर नहीं होता। घर की मैनेंजमेंट से लेकर अन्य कार्य तक महिलाओं द्वारा ही किए जाते है।
- मीनू सचदेवा, गृहिणी
बेटे के जन्म पर उत्सव ठीक है। लेकिन बेटी के जन्म पर उदासी जब तक रहेगी समाज में कुछ नहीं बदलेगा। हालांकि कुछ जगहों पर बेटी होने पर ढ़ोल तक बजाए जाते हैं। जोकि आज के समय की जरूरत भी है।
- शशि शर्मा
उड़ान के लिए दो पंखों की जरूरत होती है। विकास के लिए भी स्त्री व पुरुष दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों एक दूसरे के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। आज देखा जाए तो हर क्षेत्र में महिलाएं टाॅप पर हैं। लेकिन इस उपलब्धि में परिवार का भी अहम योगदान होता है।
- मनीषा छाबड़ा
आज महिलाएं अपने अद्धभुत, आत्मबल, दृढ़ इच्छा शक्ति और संकल्प के साथ हर क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना रही हैं। यहीं नहीं पूरी समानता के साथ वह आगे की तरफ कदम बढ़ा रही है ताकि समाज भी आगे बढ़ सकें।
- डॉ. चंचल
हर सफल आदमी के पीछे एक महिला का हाथ जरूर होता है। क्योंकि वह उसकी हर जरूरत के साथ उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलती रहती है। अपने आदम साहस के साथ पुरूष का कभी मनोबल नहीं गिरने देती।
- डॉ. नीतू
आंकड़े और रिसर्च बताती हैं कि महिलाएं आगे हैं। वह सोच समझकर ही अपना हर कदम आगे की तरफ बढ़ाती हैं। बच्चों की परवरिश हो या घर की चिंता, वह सभी को देखते हुए आगे बढ़ती है।
- मोनिका कथूरिया, उपप्रधान
एक अच्छे राष्ट्र निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्त होना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं सशक्त होती है तो समाज की स्थिरता सुनिश्चित होती है। इसी सोच के साथ ही महिलाओं को आगे आना चाहिए। अपने अधिकारों को जानना चाहिए।
- डॉ. सुमन पहल, असिस्टेंट प्रोफेसर
कुछ जगहों पर महिलाओं को जागरूक होना बहुत जरूरी है। क्योंकि आज के समय भी उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। कुछ अपनी आदतों से ही उसमें ढल चुकी है। इससे उन्हें आगे आने में झिझक होती है।
- डॉ. कमलेश
अगर किसी को मैनेंजमेंट के बारे में जानना है तो वह अपनी मां से ज्यादा किसी से नहीं जान सकता। क्योंकि मां ही सुबह जल्द उठकर दिन की रूपरेखा को सूचारू चलाने के लिए सबसे अच्छा प्रबंध करती है।
- काव्या शर्मा, छात्रा
बहुत बार देखने में आता है कि आज भी कहीं न कहीं महिलाओं को समानता के अधिकारों को जानना बहुत जरूरी है। रिसर्च में यह भी सामने आया है कि कुछ महिलाएं अधिकारों के बारे में जानना ही नहीं चाहती है।
- मुस्कान कुमारी, छात्रा
महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित बात की जाए तो कुछ राज्यों में बहुत सुधार हुआ है। अन्य सरकारों को भी महिला सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए। ताकि वह हर क्षेत्र में अपना अहम योगदान दे सकें।
- शुभांगी कुमारी, छात्रा
बहुत बार देखने में आया है कि महिलाएं सरपंच व पंच तो बन जाती हैं। लेकिन उनके पति उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन जागरूकता को देखते हुए उन्हें समाज हित की बातों के लिए खुद समाज के सामने आना चाहिए।
- हर्षिता दुबे, छात्रा
महिलाएं हर बाधा को तोड़ते हुए आगे की तरफ बढ़ती हैं। सभी के लिए सफलता और समानता का मार्ग बनाते हुए एक साथ आगे बढ़ना जारी रखना चाहिए। अपनी हर तरह की उपलब्धि को प्रसन्नता से मनाना चाहिए।
- दीक्षा चौहान, छात्रा
महिला समानता दिवस एक ऐसा दिन है, जिसको महिला सम्मान और महिलाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ी विजय के रूप में देखा जाता है। जो महिलाएं जागरूक नहीं हैं, उन्हें जागरूक करना भी जरूरी है।
- मोनिका कुमारी, छात्रा
महिला समानता दिवस को मनाए जाने के पीछे एक मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं के संघर्षों को सम्मान देना है। जिन्होंने जीवनभर समान अधिकारों की पैरवी की और उनकी विजय भी हुई।
- शैली, छात्रा
समानता दिवस मनाने का मतलब है कि समाज में नारी सशक्तिकरण की भावना जागृत हो सके। महिलाओं के समान अधिकारों के लिए हुए संघर्षों के बारे में आने वाली पीढ़ियों को अवगत करवा सकें।
- खुशी, छात्रा
महिलाओं में उमंग और जोश को भी भरना जरूरी है। ताकि वह अपने सपनों को भी पूरा कर सकें। इसके लिए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के उद्देश्य हेतु जागरूक होना जरूरी है।
- नुपुर फोसली, छात्रा
महिला समानता दिवस को मनाने का उद्देश्य समाज में महिलाओं के लिए समान अधिकारों की वकालत करना और प्राप्त समान अधिकारों के लिए संरक्षण करने के लिए जागृति फैलाने का होता है।
- प्रतिष्ठा वर्मा, छात्रा