रोहतक। जज साहब! पुलिस द्वारा बरामद दिखाई गई 996 ग्राम चरस के साथ पॉलिथीन का 9 ग्राम वजन भी जोड़ा गया है। इससे केस कॉमर्शियल की श्रेणी में आ गया। हाईकोर्ट फैसला दे चुका है कि पॉलिथीन का वजन नहीं जोड़ा जा सका। मंगलवार को एनडीपीएस एक्ट के मामले में एएसजे राकेश सिंह की अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने यह तर्क दिया। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने आरोपी जींद के जुलाना निवासी मेजर सिंह को जमानत दे दी।
बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि महम थाने में सितंबर माह में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोप था कि जींद के जुलाना गांव निवासी मेजर सिंह फरमाणा गांव में चरस बेचने आ रहा है। पुलिस ने नाका लगाकर उसे काबू किया। तलाशी के दौरान उसके पास चरस बरामद हुई। एफआईआर में लिखा है कि पॉलिथीन सहित चरस का वजन किया तो एक किलो 5 ग्राम हुआ। इसमें 9 ग्राम पॉलिथीन का वजन दिखाया गया है। वकील ने कोर्ट को बताया कि एनडीपीएस एक्ट में केस श्रेणी में रखे जाते हैं। अगर मादक द्रव्य पदार्थ का वजन एक किलो से ज्यादा है तो वह कॉमर्शियल श्रेणी में आएगा। उसमें 20 साल तक अदालत सजा दे सकती है। अगर वजन किलो से कम है तो वह मध्यम श्रेणी में माना जाता है। उसमें 10 साल की सजा भी हो सकती है। इससे नीचे कम श्रेणी के केस होते हैं। आरोपी मेजर के खिलाफ दर्ज केस में पॉलिथीन का 9 ग्राम वजन जोड़ने से कुल वजन 1 किलो 5 ग्राम हो गया। इससे केस की श्रेणी बदल गई। बरामद मादक पदार्थ का वजन 996 माना जाए। बचाव पक्ष के मुताबिक अदालत में केस किस श्रेणी में चलेगा, यह तय नहीं हो सका, लेकिन आरोपी को जमानत दे दी गई।