सांपला। सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग के तालमेल के अभाव में खंड के 9 गांवों के जलघर खाली रह गए। अब अधिकारी परेशान हैं कि इलाके की 50 हजार आबादी की दोबारा नहर आने तक कैसे प्यास बुझाएंगे।
माह में सिंचाई विभाग की तरफ से 8 दिन के लिए माइनर में पानी छोड़ा जाता है। पिछले सप्ताह शनिवार को इलाके की सभी माइनरों में पानी छोड़ा गया था। पहले दिन ही नौनंद के पास भालौठ डिस्ट्रीब्यूटरी टूट गई। उसके बाद माइनर ठीक कर दोबारा से पानी छोड़ा गया। विभाग का दावा है कि उन्होंने 8 दिन लगातार पानी चलाया, लेकिन लोगों की माने तो हकीकत ये है कि लगातार 3 दिन भी टेल तक ठीक से पानी नहीं पहुंच सका। रात को पानी बंद रहता था। सुबह 11 बजे के बाद पानी दोबारा माइनर में छोड़ा जाता था। सिंचाई विभाग की नाकामी के चलते इतनी चोरियां हुई की आसपास के गांव के जलकर के तालाब सूखे रह गए। अब माइनरों में अगस्त में पानी छोड़ा जाएगा। इस गर्मी में अब लोगों के लिए पानी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से पानी चोरी करने वाले और पानी की सुरक्षा करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों ने कहा कि सिंचाई विभाग ने अभी एक सप्ताह और पानी चलाना चाहिए। ताकि किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर सके और जल घरों के तालाब भी भर सके।
इन गांव के तालाब रहे खाली
सिंचाई विभाग की लापरवाही से गिझी, नयां बास,अटायल, दतौड़, भैंसरु खुर्द व भैंसरु कलां, समचाना, मोरखेड़ी व पाकस्मा गांव में बने जल घर के तालाब नहीं भर पाए। अब नहरों में पानी आने में एक महीना बाकी है।
ट्यूबवल के पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ महीने से इन गांवों के जलघरों में पानी की कमी है। सिंचाई विभाग ्रट्यूबवेल से सप्लाई करता है, लेकिन भूमिगत पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जा रहा। कई ट्यूबवेल तो नमकीन पानी फेंक रहे हैं। ऐसे में अब लोगों की कैसे प्यास बुझेगी।
व्यर्थ पानी न बहाए
पब्लिक हेल्थ विभाग के एसडीओ अनिल कुमार का कहना कि उन्हें आलाधिकारियों को पिछले 2 महीने से पानी के संकट से अवगत कराया हुआ है। सिंचाई विभाग को भी इस संबंध में पत्र भेजा गया था। सिंचाई विभाग ने एक सप्ताह के लिए जो पानी छोड़ा वह जल घरों तक पुरा नहीं पहुंचा। इसकी वजह से कई जल घरों के तालाब खाली रह गए है। ट्यूबवेल से सप्लाई दी जा रही है।