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हरियाणा में उपद्रव की जांच की आंच उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक

Sat, 05 Mar 2016 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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कृषिमंत्री के अनुसार संदिग्धों के नंबर हुए ट्रेस, नेताआें के भी होने का शक - फोटो : amar ujala
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हरियाणा में उपद्रव की जांच की आंच दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक भी पहुंचेगी। क्योंकि जिन संदिग्धों के उपद्रव के समय हरियाणा में घुसने की बात कही जा रही है, वे उत्तर प्रदेश और दिल्ली से आए हैं। प्रदेश जलाने के लिए जिस बर्निंग कोल और केमिकल का इस्तेमाल हुआ वह भी दिल्ली के रास्ते लाया गया था। वहीं, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की मानें तो सभी उपद्रवियों के नंबर ट्रेस हो चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि इसमें कुछ नंबर नेताओं के हैं।
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प्रदेश में उपद्रव के दौरान जिस तरह से तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की गई है, उससे सरकार पहले ही साजिश बता रही थी। अब इस साजिश की परतें उखड़ने लगी हैं। जहां प्रदेश को जलाने में दुबई के बर्निंग कोल और चीन के केमिकल को इस्तेमाल करने की बात सामने आई है और उस पर जांच भी शुरू करा दी गई है।

वहीं, अब एक नया खुलासा हो रहा है कि उपद्रव के समय यहां कुछ संदिग्ध उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सीमा से भी आए थे। सूत्रों के अनुसार जितने भी संदिग्ध मोबाइल नंबर ट्रेस हुए हैं, उनकी लोकेशन उपद्रव से पहले उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मिली है। इसके अलावा बर्निंग कोल और केमिकल भी दिल्ली के रास्ते यहां लाया गया था। इस तरह उपद्रव की जांच की आंच राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक भी पहुंचेगी।
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आगजनी में बर्निंग कोल और केमिकल के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद एफएसएल की टीम को जांच में लगाया गया है। टीम ने आगजनी वाली कई जगहों से पहले ही सैंपल लिए थे, जिनमें यह देखा जाएगा कि किस-किस जगह बर्निंग कोल और केमिकल का इस्तेमाल किया गया है।

सरकार हर पहलू पर जांच करा रही है, क्योंकि प्रदेश को बड़ी साजिश के तहत जलाया गया है। ऐसे संदिग्ध नंबर ट्रेस हुए हैं, जिन पर बाहर से यहां आकर उपद्रव में शामिल होने का शक है। उन सभी की जांच कराई जा रही है। इसके अलावा उनमें नेताओं के नंबर होने का भी शक है। जांच में बड़े नेताओं के शामिल होने की पुष्टि होने पर उनको भी जेल भेजा जाएगा। 
ओपी धनखड़, कृषि मंत्री, हरियाणा सरकार।

केंद्रीय एजेंसियों से कराई जा सकती है जांच
प्रदेश को जलाने में दुबई निर्मित बर्निंग कोल और चीन निर्मित केमिकल के इस्तेमाल किए जाने के साक्ष्य मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए पूरी तह तक पहुंचना चाहती है और इसलिए केंद्रीय एजेंसियों से जांच में मदद ली जा सकती है। जिसमें एनआईए का सहारा लेने पर विचार चल रहा है।
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