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अल्ट्रासाउंड : इंतजार हम कब तक करेंगे भला...

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पीजीआई में अल्ट्रासांउड कराने के लिए अपनी बारी के इंतजार में बैठे मरीज और परीजन। अमर उजाला
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रोहतक। पीजीआईएमएस के रेडियोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड करवाना मरीजों के लिए चुनौती बना है। पहले तो यहां दो दिनों के बाद जांच कराने का नंबर आता है। उसपर दिनभर मरीजों को अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इससे परेशान होकर कई मरीज निजी जांच केंद्र का रुख करते हैं।
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ज्ञात हो कि पीजीआईएमएस के रेडियोलॉजी विभाग में पांच मशीनों से रोजाना 400 से अधिक मरीजों की जांच होती है। आपात विभाग के मरीजों का दबाव भी यहां अतिरिक्त बना रहता है। ऐसे में सामान्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच करवाने के लिए एक से दो दिन तक का समय लगता है। कई मरीज तंग आकर निजी जांच केंद्र का रुख करते हैं। इन्हीं समस्याओं को जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने सोमवार को विभाग का जायजा लिया और मरीजों से उनका हाल जाना।
सुबह से शाम तक करते हैं इंतजार
संस्थान के पुराने आपातकालीन विभाग के ऑपरेशन थियेटर व रेडियोलॉजी विभाग के बीच खुले में मरीज गर्मी में अल्ट्रासाउंड जांच करवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार करने पर मजबूर हैं। यह इंतजार सुबह आठ बजे से देर शाम तक चलता है। यहां मरीज को नाम व उनके अंक से बुलाया जाता है। सुरक्षा व्यवस्था बनाने के लिए गेट पर निजी सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है ताकि कोई जबरन अंदर न जा सके। यहां के गेट पर हमेशा मरीजों की भीड़ जुटी रहती है और मरीजों की गार्डों से कहासुनी होती रहती है। कई बार तो नौबत झड़प तक हो जाती है। गौरतलब है कि जिले से ही नहीं प्रदेश के अलावा दिल्ली, राजस्थान व पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भी मरीज उपचार के लिए आते हैं।
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मरीजों ने साझा किया दर्द
मामला एक
मेरी पत्नी को पेट दर्द की शिकायत है। इसको लेकर पिछले दो घंटे से अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर बैठे हैं। दर्द ज्यादा है, लेकिन अंदर आसानी से नहीं जा सकते। डॉक्टर को शुक्रवार दिखाया था, इससे पहले भी अल्ट्रासाउंड कराया था। उस समय भी सुबह से शाम तक यहां बैठना पड़ा था। एक बार इलाज कराने आने पर पूरा दिन यहीं इंतजार में निकल जाता है।
- चंद्र सिंह, गोहाना
मामला 2
मुुझे कई दिन से छाती में दर्द है। डॉक्टर को दिखाया तो अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। दो घंटे से यहां बैठी इंतजार कर रही हूं और पता नहीं है कि कब नंबर आएगा। यहां कई लोग ऐसे भी हैं जो बाद में आए और उन्हें पहले ही अंदर बुला लिया गया। समझ नहीं आ रहा है कि यहां क्या व्यवस्था है। संस्थान को डॉक्टरों व जांच मशीनों की संख्या को बढ़ानी चाहिए।
- पूनम, चुलियाना
मामला 3
कई दिनों से खांसी व बुखार की शिकायत है। शनिवार को डॉक्टर को दिखाया था, अल्ट्रासाउंड के लिए दो दिन बाद नंबर आया। जिस डॉक्टर को दिखाया उस दिन पूरा दिन इंतजार के बावजूद नंबर नहीं आया। सुबह नौ बजे से आज बैठे हैं जांच होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। कई बार नर्स व डॉक्टर आते हैं और मरीजों के साथ अंदर जाते हैं। सामान्य मरीज बाहर ही इंतजार करता रहता है।
- रीना, एकता कॉलोनी
केस 4
गर्दन में काफी दर्द है। शनिवार को डॉक्टर को दिखाया। पूरे दिन इंतजार के बावजूद अल्ट्रासाउंड कराने का नंबर नहीं आया। फिर से आज अल्ट्रासाउंड कराने आए हैं। पिछले चार घंटे से बाहर बैठे हैं। अगर आज भी नंबर नहीं आता है तो डॉक्टर को बुधवार को ही दिखा सकेंगे, तब तक सिर्फ इंतजार कर सकते हैं। बीच-बीच में आपात विभाग के केस के मरीज आते हैं तो सामान्य मरीजों की जांच रुक जाती है।
उर्मिला, सुनारिया चौक
बोले अधिकारी-
रेडियोलॉजी विभाग के अलावा स्त्री रोग, लाला श्याम लाल सुपर स्पेशियालिटी में भी अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते नंबर आने में देरी हो सकती है। मरीजों को समस्या न हो, इसके लिए संबंधित विभाग से बात करेंगे। विभाग 24 घंटे आपातकालीन विभाग के मरीजों की जांच करता है, ऐसा नहीं है कि किसी गंभीर मरीज की जांच न हो। इन मरीजों को अन्य मरीजों की तुलना में प्राथमिकता दी जाती है।
- डॉ. शमशेर लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस
सात हजार से अधिक की है ओपीडी
संस्थान की विभिन्न ओपीडी में रोजाना सात हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। 600 के करीब मरीजों को प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा है। इसमें से कुछ लंबी कतार या अगले दिन नंबर आने की बात पर ही निजी जांच केंद्र का रुख कर लेते हैं। मरीजों का कहना है कि वह पहले दिन पंजीकरण के लिए लाइन में लगते हैं। इसके बाद डॉक्टर के पास नंबर आने और फिर जांच पर्ची बनवाने में कतार में लगना पड़ता है। यही नहीं मरीज को जांच करवाने व रिपोर्ट लेने के अलावा दवा काउंटर पर दवा लेने के लिए हर जगह कतार में खड़े होना पड़ता है। मरीज यदि चाहे एक दिन में सभी कार्य पूरे करवा ले तो असंभव है। यहां कहने के लिए ऑनलाइन सिस्टम है। सोमवार की ओपीडी पर मरीज को जांच रिपोर्ट लेकर आने में अगली ओपीडी पर ही डॉक्टर से मिलना होता है। इस दौरान मरीज को दर्द झेलना पड़ता है और रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता है।
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