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Rohtak News: दशलक्षण पर्व का आज नौवां दिन, जैन मंदिरों में उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा

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-फोटो 57 : उत्तम आकिंचन्य धर्म की उपासना करते जैन समाज के लोग।
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बहादुरगढ़। दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन सोमवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की उपासना की। शहर के किला मोहल्ला में स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में जैन समाज के प्रवक्ता दीपक जैन ने कहा कि आकिंचन्य का अर्थ परिग्रह को छोड़ना है। जिना परिग्रह, उतना तनाव। मनुष्यों को केवल अपने सम्मान की परवाह नहीं करनी चाहिए। बल्कि दूसरे व्यक्ति को आपकी बातों के कारण आत्मसम्मान पर ठेस नहीं पहुंचे, इसके लिए प्रयास करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि दूसरे व्यक्ति के दर्द को अहसास करने वाला व्यक्ति ही दूसरों की मदद कर सकता है। समन्वय सौभाग्य को आमंत्रण देता है। बुरी परिस्थितियों में संस्कारों की असली परीक्षा होती है। सार्वजनिक रूप से आपकी आलोचना करने वाले व्यक्ति कभी आपके शुभचिंतक नहीं हो सकते। परिग्रह मनुष्य की शांति को छीन लेता है। उन्होंने कहा कि धन का लोभ दुख है और धन की प्राप्ति हो जाना दुख में वृद्धि है। मोक्ष मानव का अंतिम लक्ष्य है।
मनुष्यों को 24 घंटे में कम से कम दो घंटे भगवान की प्रार्थना, भक्ति एवं ध्यान के लिए निश्चित निकालना चाहिए। इस मौके पर आनंद जैन, मुनीष जैन, सचिन, मनीष, नवीन, अमन, मोना जैन, राजबाला, शैला जैन, उर्मिला जैन, विद्या जैन, मोनिका के अलावा अन्य लोग उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम कई दिनों से चल रहा है। अनाज मंडी स्थित पांडूशिला पर भी कार्यक्रम हुआ। 18 सितंबर को क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा और जैन समाज की ओर से रथ यात्रा निकाली जाएगी।
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