रोहतक को चौधर का स्वाद चखाने वाले हुड्डा परिवार की तीसरी पीढ़ी लोकसभा चुनाव के मैदान में है। 1952 से 2019 तक परिवार ने 12 लोकसभा चुनाव लड़े, जिसमें नौ में जीत मिली और तीन हार गए।
हरियाणा में राजनीति को क्षेत्र के हिसाब से छह भागों में बांटा जाता है। एक तरफ पंचकूला से लेकर पानीपत तक जीटी रोड बेल्ट है। इससे आगे देशवाली बेल्ट है, जिसमें रोहतक, झज्जर व सोनीपत जिला आता है।
फरीदाबाद से लेकर नारनौल तक यादव बाहुल्य दक्षिण हरियाणा है। भिवानी, हिसार व सिरसा बागड़ी बेल्ट में आते हैं। जींद, कैथल व फतेहाबाद का इलाका बांगर बेल्ट कहलाता है। इसके अलावा फरीदाबाद व पलवल का क्षेत्र है, जो यूपी से सटा है।
देशवाली बेल्ट में कांग्रेस का मतलब हुड्डा है। अब तो कांग्रेस के लोकसभा चुनाव को लेकर हुए टिकट बंटवारे में भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चली है। हुड्डा परिवार मूलरूप से रोहतक जिले के गांव सांघी का रहने वाला है, जिसकी तीसरी पीढ़ी पांचवीं बार लोकसभा के चुनावी मैदान में है।
भजनलाल की जगह जब हुड्डा बने सीएम
मार्च 2005 में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भूपेंद्र हुड्डा मुख्यमंत्री बने। सियासी हलकों में कहा जाता था कि राजनीति में भजनलाल को पीएचडी हासिल है, लेकिन हुड्डा के आगे उनकी नहीं चली। सबसे ज्यादा दिन तक लगातार मुख्यमंत्री रहने का रिकाॅर्ड भी हुड्डा के नाम है। वह 9 साल 235 दिन मुख्यमंत्री रहे।