रोहतक। हाड़ कंपाने वाली ठंड में प्रवासी और बेसहारा लोगों को राहत देने के लिए बनाए गए रैन बसेरे खाली पड़े हैं। वीआईपी रैन बसेरे पर ताला लगा है। रेलवे स्टेशन पर लोग जमीन पर सोने को विवश हैं। ऐसे में रैन बसेरों की व्यवस्था भी बेमानी साबित हो रही है। अमर उजाला ने रैन बसेरों की पड़ताल की तो चिंंताजनक तस्वीर सामने आई। रेलवे स्टेशन परिसर में रात को लोग फुटपाथ और यार्ड की जमीन पर खुले में सो रहे लोग ठिठुरते मिले। इस कारण खुले में सोने वालों को हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान सामान्य से नीचे चले जाना) का खतरा बढ़ गया है। हाइपोथर्मिया के कारण कार्डियक अरेस्ट, शॉक और कोमा की स्थिति बन सकती है।
तापमान लगातार गिर रहा है। शून्य की ओर लुढ़कते तापमान के कारण ठंड भी बढ़ती जा रही है। इस ठंड में खुले आसमान तले रात गुजारना खुद को बीमार करने सरीखा है। यह हाल इन दिनों रेलवे स्टेशन पर साफ नजर आता है। यहां लोग ठंडी जमीन पर सोने को विवश हैं। इनके पास ओढ़ने व बिछाने के लिए भी एक कंबल ही होता है। ऐसे लोगों के लिए रैन बसेरा बना है, मगर वह काम नहीं आ रहा है। रेलवे स्टेशन से करीब ढाई किलोमीटर दूर शहर थाने के सामने बने रैन बसेरे तक चंद ही लोग पहुंच पा रहे हैं। इस कारण यह लगभग खाली पड़ा रहता है। यहां का वीआईपी केबिन पूरी तरह बंद है। इस पर ताला लटका रहता है। मजबूरी में लोगों को रात रेलवे स्टेशन के फुटपाथ पर काटनी पड़ रही है।
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यूं बयां की परेशानी
सर्दी में फुटपाथ पर सोना हमारी मजबूरी है। हम प्रवासी हैं। दानवीर आते हैं। वहीं कंबल, खाना व अन्य चीजें दे जाते हैं। इन्हीं से गुजारा चलता है। यहां नहीं सोएंगे तो कहां जाएंगे।
ललित,
ठंड ज्यादा है। इस बार कंपकपी छूट रही है। कंबल से ठंड जाती नहीं है। कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। रैन बसेरे कहां हैं, नहीं जानते हैं। ठंड के चलते नींद तो आती नहीं, किसी तरह रात काटते हैं।
- रणधीर
गरीब की जिंदगी की असल हकीकत यही है। ठंड से परेशान हैं लेकिन यही हमारा ठिकाना है और नसीब है।
- दिलबाग
वर्जन
पुराना बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे में खाने-पीने, साेने के लिए कंबल और बिस्तर आदि की सुविधा दी गई है। वीआईपी की भी व्यवस्था की गई है। ये कभी कभार आते हैं। रोज आने वालों के लिए सामान्य व्यवस्था है। कहीं कोई समस्या है तो उसे दुरुस्त किया जाएगा।
- डॉ. परमानंद स्वामी, संस्थापक जनसेवा संस्थान।
ठंडे तापमान के लगातार संपर्क में रहने से हाइपोथर्मिया होता है। शरीर में संग्रहित ऊर्जा का उपयोग करते हुए तापमान कम कर देता है। यह एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है। इसके लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है।
-डॉ. पुष्पेंद्र, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल।