रोहतक। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए वैज्ञानिक नवोन्मेष करने की जरूरत है। वैज्ञानिक शोध को नवाचारी बना, विभिन्न वैज्ञानिक-चिकित्सीय चुनौतियों का निवारण कर, प्राध्यापकगण-वैज्ञानिकगण नूतन भारत का निर्माण कर सकते हैं। बुधवार को एमडीयू में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर पीजीआईएमएस के वरिष्ठ प्रोफेसर व डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. ध्रुव चौधरी ने यह बात कहीं।
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के फैकल्टी सदस्य डाॅ. बनवारी लाल ने माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक उपयोग बारे चर्चा की। मौके पर डीन प्रो. अनूप सिंह मान, डाॅ. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. अरुण नंदा, प्राध्यापिका डाॅ. महक डांगी, डाॅ. एकता नरवाल, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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अलग-अलग प्रतियोगिताओं में वंशिका, अंजलि शर्मा, ऋतिक व स्वाथि प्रथम
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस संबंधित इवेंट्स के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पोस्टर प्रतियोगिता में यूआईईटी की वंशिका प्रथम, स्लोगन राइटिंग में कंप्यूटर साइंस विभाग की अंजलि शर्मा प्रथम, रंगोली में केमिस्ट्री विभाग का ऋतिक प्रथम, डेक्लामेशन व डिबेट में जूलॉजी की स्वाथि ने प्रथम, विज्ञान प्रश्नोत्तरी में केमिस्ट्री की टीम- आदित्य शशि व गौरव प्रथम, प्रस्ताव लेखन में यूआईईटी की संवेदना प्रथम रही।