रोहतक। गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से मंडी में शुरू हो चुकी है। अब तक मंडी में किसानों के लिए कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। यह कहना है हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव बजरंग गर्ग का। वह बुधवार को मंडी में व्यापारियों के साथ बैठक करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
बजरंग गर्ग ने कहा कि गेहूं की सरकारी खरीद पर 2275 रुपये एमएसपी के अनुसार आढ़तियों की आढ़त 56.87 रुपये बनती है, मगर सरकार आढ़तियों की आढ़त 10 रुपये 99 पैसे कम करके 45 रुपये 88 आढ़तियों को दे रही है। इसी प्रकार धान पर भी सरकार आढ़तियों को आढ़त काफी कम दे रही है। आढ़तियों की आढ़त कम करने से व्यापारियों में सरकार के प्रति भारी रोष है, जबकि सरकार को हर अनाज की खरीद आढ़तियों के माध्यम से करके 2.5 प्रतिशत पूरा कमीशन देना चाहिए।
हरियाणा सरकार टैक्स में रियायत देने के बजाय सब्जी व फलों पर मार्केट फीस लगाकर गरीबों के मुंह का निवाला छीनने का काम किया है, जबकि कांग्रेस सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सब्जी व फलों पर से मार्केट फीस हटाई थी। कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार को मंडियों में सुविधा देनी चाहिए। सरकार की ओर से व्यापारी व उद्योगपतियों को सुविधाएं दिए जाने से गांव स्तर पर हैंडलूम, नमकीन, बेकरी, कूलर, पंखे, पीलंग, निवार, साबुन, तेल व छोटी-छोटी मिलें लगेंगी। गांव स्तर पर छोटे-छोटे उद्योग लगने से गांवों में ही लाखों माताएं, बहनों और युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे हरियाणा में काफी हद तक बेरोजगारी कम होगी।
सरकार की ओर से मंडियों में अनाज की खरीद करने पर अनाज सरकारी एजेंसियों का हो जाता है। अनाज खरीद का ठेकेदार की ओर से समय पर उठान नहीं करने पर अनाज में घटती आती है, जबकि सरकारी ठेकेदार व सरकारी खरीद एजेंसी की लापरवाही के कारण अनाज का उठान मंडियों में देरी से होता है। इस मौके पर व्यापार मंडल प्रदेश महासचिव रमेश खुराना, मंडी प्रधान मुकेश बंसल, उप प्रधान मोहित पांचाल, सचिव प्रमोद कुमार, कोषाध्यक्ष भूप सिंह, पूर्व प्रधान डिंपल बुधवार, वैश्य समाज जिला प्रधान लोकेश जैन, राजकुमार, सतीश वत्स, जयपाल बल्हारा मौजूद रहे।