रोहतक। हरियाणा राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों के धरने ने गर्भवती महिलाओं व उनके गर्भस्थ शिशुओं की परेशानी बढ़ा दी है। इसकी वजह एचआईवी, एसटीडी व टीबी जांच नहीं होना है। यह जांच नहीं होने से गर्भस्थ शिशु के इन गंभीर रोगों से संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है।
जिले में रोजाना ऐसे एक हजार मरीज प्रभावित हो रहे हैं। अकेले पीजीआईएमएस में 600 से अधिक व नागरिक अस्पताल करीब 200 व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के 200 मरीज हैं। प्रसव पूर्व जांच में एचआईवी पॉजीटिव मरीज से शिशु को संक्रमण से बचाया जा सकता है। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल इन मासूमों पर भारी पड़ सकती है। ऐसे मामलों में जांच रिपोर्ट तो दूर की बात, जांच तक ढंग से नहीं हो रही है। पीजी चिकित्सक फिलहाल हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
कर्मचारियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी :
हरियाणा राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी पंचकूला के विभिन्न कर्मचारियों का जिला स्तर पर सिविल सर्जन कार्यालय रोहतक के बाहर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल चौथे दिन भी जारी है। अस्पतालों में आने वाली गर्भवती महिलाओं की टीबी, एचआईवी व एसटीडी जांच नहीं हो रही है। रोजाना सौ गर्भवती महिलाएं पीजीआई की ओपीडी जांच कराने पहुंचती हैं। ऐसे ही नगारिक अस्पताल और जिले के सेंटर में भी पहुंचती हैं। जिले में कुल संख्या रोजाना 200 के पार रहती है।
एड्स कंट्रोल सोसाइटी को नहीं दिया गया कोई लाभ
कर्मचारियों ने सरकार के सौतेले व्यवहार की वजह से हड़ताल करने को मजबूर हुए क्योंकि एड्स विभाग सबसे पहले शुरू हुआ था। टीबी, आरसीएच, आरबीएसके बाद में शुरू हुई और एनएचएम डिपार्टमेंट बनाकर उनको उनके नियमानुसार सेवा समेत कई लाभ दिए गए। सिर्फ एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों को छोड़ दिया गया। कोई लाभ नहीं दिया गया।
गंभीर बीमारियों के रिस्क पर रहते हैं कर्मचारी
यह कर्मचारी इलाज में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्योंकि यह गंभीर बीमारी के मरीजों को देखते हैं। क्योंकि किसी भी इलाज के शुरू होने से पहले एड्स या एचआईवी टेस्ट के बिना डॉक्टर भी मरीज को हाथ नहीं लगाते हैं इसलिए यह कर्मचारी हमेशा गंभीर बीमारियों के रिस्क में रहते हैं। इसके बावजूद एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों के साथ बहुत ही सौतेला व्यवहार सरकार की ओर से किया जा रहा है। एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों ने सरकार से आग्रह किया कि उन्हें भी नियमित करने की पॉलिसी में शामिल किया जाए।