18सीटीके06-एमडीयू संस्कृत विभाग में विद्यार्थियों को संबोधित करते आचार्य नवीन। स्रोत:एमडीयू
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के संस्कृत विभाग में मंगलवार से तीन दिवसीय ध्यान योग कार्यशाला प्रारंभ हुई। प्रथम दिन आनंदमय वैदिक योगशाला के संचालक आचार्य नवीन ने अपने वक्तव्य में व्यक्तियों के चेतना स्तर को ऊपर उठाने में ध्यान की भूमिका के बारे में समझाया। उन्होंने बताया कि पतंजलि कृत योग दर्शन के चार अध्यायों का संबंध मानव के मस्तिष्क की संरचना के चार भागों के साथ है व योग दर्शन में प्रतिपादित सिद्धांतों को जीवन में उतारकर व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर आप ध्यान और योग को अपने जीवन का अंग बनाते हैं तो आपका जीवन धीरे धीरे पूर्णत: सकारात्मक दिशा में परिवर्तित होता चला जायेगा। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीभगवान ने धन्यवाद किया। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में ध्यान एवं योग को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का समन्वयन एवं रूपरेखा प्रो. सुनीता सैनी तथा डॉ. सुषमा नारा ने किया।