रोहतक। रेलवे ट्रैक के विस्थापितों की दुकानों को लेकर शहर की सियासत गरमा गई है। भाजपा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का आरोप है कि कांग्रेस के विधायक भारत भूषण बतरा शहरवासियों को गुमराह कर रहे हैं। जबकि विधायक भारत भूषण बतरा का कहना है कि पूर्व मंत्री अपनी नाकामी छुपा रहे हैं। उधर, सियासत के बीच फंसे रेलवे ट्रैक के विस्थापितों ने जल्द बैठक बुलाकर अगला कदम उठाने की बात कही। जबकि मेयर का कहना है कि सरकार का पत्र मिलने के बाद ही नगर निगम विस्थापितों के लिए कुछ कदम उठा सकेगा।
रोहतक-पानीपत वाया गोहाना रेलवे लाइन शहर के बीचोंबीच से गुजरती है। इसके चलते अकसर बजरंग भवन व शीला बाईपास के नजदीक फाटक बंद होने से सिविल रोड व बस स्टैंड रोड पर जाम की स्थिति रहती थी। वर्ष 2017 में रेलवे ने राज्य सरकार के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन से लेकर राजीव गांधी स्टेडियम तक एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाया था। इसके लिए गांधी कैंप के 37 लोगों की दुकानें व 5 मकान तोड़े गए। सरकार ने पावर हाउस चौक के नजदीक 57 दुकानें बना दी हैं, लेकिन उनको आवंटित नहीं किया गया है। अब 2024 में पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में विस्थापितों का मामला चुनावी मुद्दा बन सकता है।
विधायक चाहे तो सार्वजनिक मंच पर आकर बहस कर लें : ग्रोवर
भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि 2004 से 2014 तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही। मौजूदा कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा बताएं, शहर के लिए क्या किया। काठमंडी व किला रोड बाजार तोड़फोड़ हुई। काठमंडी को आज तक शहर से बाहर नहीं ले जाया जा सका। मैंने एलिवेटेड रोड के विस्थापितों के साथ कोई वादा नहीं किया था। फिर भी विवेकानंद कॉम्प्लेक्स बनाकर दिया है। अब दुकानें देना मेयर व नगर निगम पार्षदों का काम है। विधायक चाहे तो सार्वजनिक मंच पर आकर मेरे से बहस कर लें।
छह साल बाद भी रेलवे रोड के विस्थापितों को दुकानें व मकान नहीं मिले : बतरा
कांग्रेस के स्थानीय विधायक भारत भूषण बतरा का कहना है कि छह साल बाद भी रेलवे रोड के विस्थापितों को दुकानें व मकान नहीं मिले हैं। अपनी नाकामी छुपाने के लिए पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर बिना तथ्यों के बात कर रहे हैं, यह उनकी बौखलाहट है। जल्द ही शहर के सभी मुद्दों को लेकर पूर्व मंत्री के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दूंगा। इससे ज्यादा अभी कुछ नहीं कहना चाहता हूं।
1955 में नगर पालिका ने दी थी जमीन, तहसील में हुई रजिस्ट्री, जल्द बुलाएंगे बैठक
सरकार ने दुकानदारों को रेलवे लाइन के किनारे पैसे लेकर 1955 में जमीन दी थी, जहां दुकानें व मकान बनाए गए। 1975 में तहसील में रजिस्ट्री भी हुई। जो सभी दुकानदारों के पास है। अब कैसे रजिस्ट्री गलत हो सकती हैं। जल्द विस्थापित बैठक करके आगे के लिए फैसला लेंगे।
हरिओम नागपाल, विस्थापित रेलवे रोड ट्रैक
पार्षदों की तीन सदस्यीय कमेटी को कर दिया किनारे, जल्द बुलाएंगे हाउस की बैठक
नगर निगम के मेयर मनमोहन गोयल का कहना है कि विस्थापितों को दुकानें देने के लिए प्रशासन के कहने पर ही पार्षद कंचन खुराना, राधेश्याम ढल व मुक्ता नागपाल की तीन सदस्यीय बैठक बुलाई थी। प्रशासन ने कमेटी के साथ तीन-चार बैठक की, बाद में अनदेखी शुरू कर दी। अब सरकार की तरफ से मामले को लेकर कोई पत्र आता है तो हाउस की बैठक बुलाकर कोई न कोई रास्ता निकालेंगे।
नगर निगम दे विस्थापितों को उनका हक
भाजपा के पूर्व पार्षद अशोक खुराना का कहना है कि रेलवे ऐलिवेटड ट्रैक के विस्थापितों को उनका हक दिया जाए। क्योंकि तत्कालीन नगर पालिका ने पैसे लेकर रजिस्ट्री करवा रखी है। वे पूरी तरह विस्थापितों के साथ हैं और उनकी आवाज उठाते रहेंगे। मामले को लेकर नगर निगम की तत्काल बैठक बुलाई जाए।