रोहतक। नगर निगम में वीरवार को मेयर मनमोहन गोयल और ज्वाइंट कमिश्नर विजय मलिक की अध्यक्षता में जनता दरबार लगाया गया। इस दौरान 80 शिकायतें रखी गईं, इनमें से अधिकतर प्रॉपर्टी व फैमिली आईडी से संबंधित रहीं।
यहां एक बुजुर्ग अपने मकान की आईडी ठीक करवाने आया था। उसने अधिकारियों से सवाल पूछते हुए कहा कि वह तीन जनता दरबारों में आ चुका है और उसे इस हालत में कब तक आना होगा। समस्या का कुछ हल निकले तो वह पैर में दर्द का उपचार करवा पाएगा।
सुबह करीब 11 बजे मेयर के कार्यालय में जनता दरबार शुरू हो गया था। दरबार शुरू होने के ठीक 20 मिनट बाद ज्वाइंट कमिश्नर विजय मलिक, सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल, डिप्टी मेयर अनिल कुमार भी दरबार में पहुंचे। शिकायतकर्ताओं की शिकायतों को सुना गया। इसमें जनता कॉलोनी से आए अनिल कुमार ने दो प्लाटों की एक प्रॉपर्टी आईडी बनाने से संबंधित शिकायत बताई तो उसके कागज जमा करवा लिए गए। लेकिन समाधान कब तक होगा यह नहीं बताया गया। हालांकि कुछ शिकायतें ऐसी थीं जिनका मौके पर भी निपटारा करवाया गया। फैमिली आईडी में नाम बदलने व अन्य बदलाव को लेकर तुरंत समाधान का आश्वासन दिया गया।
कुछ शिकायतें ऐसी भी आईं जिनका एक हफ्ते में समाधान करने की बात कही गई थी। लेकिन मौके पर पहुंचे शिकायतकर्ताओं से बात की तो उनमें से कुछ ने कहा कि वह तीन-तीन महीने से चक्कर काट रहे हैं। उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि दरबार लगाकर हमारा समाधान करवा दिया जाएगा।
यह बोले लोग
पिछले दो महीने से नगर निगम के चक्कर काट रहा हूं। पुराने कागजों में निगम ने प्लॉट मेरे नाम दर्शाया है। लेकिन जब से नई प्राॅपर्टी आईडी बनाई गई है। उसमें प्लाॅट किसी के नाम नहीं दिखाया गया है। अन्य 100 गज के प्लाॅट में एक टावर लगवाया हुआ है। पिछले साल का समय पर टैक्स जमा करवाने के बाद भी पुराना टैक्स दोबारा से जोड़कर भेजा गया है।
- राजवीर सिंह, रामगोपाल कॉलोनी
पिता ने प्लाट को हम दो भाईयों में बांट दिया था। उस समय दोनों ने अपने-अपने हिस्से की रजिस्ट्री व इंतकाल भी करवा लिया गया था। लेकिन निगम ने ऐसा किया कि उस प्लाट के दोनों हिस्सों की एक प्रोपर्टी आईडी बनवा दी। जोकि आईडी कागजात के हिसाब से अलग से बननी चाहिए। इसके लिए तीन महीने से चक्कर काट रहा हूं। निगम कह रहा है कि प्लाट के बीच में अलग से एक दीवार बनाओ तब इसका समाधान हो पाएगा।
-राजेश, शीतल नगर
हम बीसीए केटेगरी में आते हैं, लेकिन निगम ने शुरू से ही फैमिली आईडी में हमें एससी कैटेगरी में दिखाया हुआ है। जबकि अन्य कागजों में बीसीए है, निगम को अपने कागजात भी दिखा चुका, इसके बावजूद भी यह समाधान नहीं हो रहा। पिछले ढाई महीने से यहां के चक्कर लगा रहा हूं। लेकिन इधर उधर भेज देते हैं। कागज पूरे करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
देवेंद्र, कमला नगर