बहादुरगढ़। विधानसभा चुनाव की जंग में इस बार बहादुरगढ़ सीट पर भी मुकाबला रोचक होने जा रहा है। दो मुख्य पार्टियों और एक निर्दलीय प्रत्याशी एक ही गांव लोवा खुर्द के रहने वाले हैं। एक बहादुरगढ़ के जटवाड़ा मोहल्ला से तो एक जाखौदा गांव के रहने वाले हैं। इनमें कड़ा मुकाबला है।
शहर की एक हुक्का चौपाल में बैठे बुजुर्ग चुनावी चर्चा में मशगूल थे। कोई किसी पार्टी के प्रत्याशी को जिता रहा था तो कोई निर्दलियों पर जोर लगा रहा था। वहीं, पास बैठे एक बुजुर्ग ने कहा, भाई अब नेताओं की मरोड़ तो ढीली होती जा रही है जो नेता बाजार में हाथ हिलाकर निकल जाया करते थे, वह अब बुजुर्गों के पैर छू रहे हैं। इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि एक नेता तो टिकट मिलने के बाद विजयी चिह्न बनाकर बाजार में घूम रहा था और लोगों की शुभकामनाओं का जवाब भी थैंक्यू बोलकर दे रहा था। दूसरे बुजुर्ग ने कहा भाई गलती इनकी नहीं है, ये तो 15 दिन अब ठीक रहेंगे, लेकिन उसके बाद तो जनता से मिलेंगे भी नहीं। वोट करते समय ही हमें ध्यान रखना होगा कि कौन मिलनसार है और किसका घमंड सातवेें आसमान पर है। ऐसे में बाद में पछताने से अच्छा है कि पहले ही सही निर्णय लिया जाए। इसी दौरान एक ताऊ ने कहा कि नेता तो अब वोट के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।