रोहतक। विधानसभा में सोमवार को रोहतक में 30 जून को बारिश के बाद हुए जलभराव का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा ने कहा कि जनस्वास्थ्य विभाग का सिस्टम फेल होने के कारण घरों में तीन-तीन फीट तक पानी भर गया। राहड़ रोड, लाडवाला जोहड़ व अप्पू घर में तालाब बनाकर पानी स्टोर किया जाए। जवाब में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि रोहतक में बारिश का पानी क्यों भरा, इसकी जांच करवाई जाएगी।
मानसून सत्र में सोमवार को चर्चा के दौरान विधायक भारत भूषण बतरा ने कहा कि 30 जून को बारिश के कारण छोटू राम चौक पर साढ़े तीन फीट पानी खड़ा हो गया, जो दुकानों व घरों में घुस गया। साथ ही महावीर कॉलोनी, कृष्णा कॉलोनी, गुरुनानक पुरा, टीबी अस्पताल के सामने लोगों के घरों में पानी दो दिन तक खड़ा रहा। इन इलाकों में भारी संपत्ति का नुकसान हुआ। विधानसभा में बताया जाए कि आखिर जलभराव का क्या कारण रहा। लोगों को उनके नुकसान के लिए मुआवजे का कोई प्रस्ताव सरकार के सामने विचाराधीन है या नहीं। इतना ही नहीं, विधायक ने बताया भारी बरसात वाले दिन ही वे लगातार डिस्पोजल पर गए, अप्पू घर डिस्पोजल काम नहीं कर रहा था। विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा खुद महावीर कॉलोनी व कृष्णा कॉलोनी के जलभराव वाले इलाकों में 2 दिन बाद गए। तब भी वहां पानी जमा था और तब भी वहां डिस्पोजल काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने उसी दिन चीफ सेक्रेटरी को इस बारे में पत्र लिखा, रोहतक के डीसी से बात की और उन इलाकों के सर्वे के लिए कहा, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।
ज्यादा बारिश होने से आई दिक्कत, मुआवजे का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं
विधानसभा में सरकार की तरफ से बताया गया कि 30 जून को रोहतक में 6 से 7 घंटे के दौरान लगभग 153 मिलीमीटर वर्षा हुई। पानी 30 जून की रात को ही निकाल दिया गया था। छोटू राम चौक पर एकत्रित हुए पानी से दुकानों और घरों को कोई नुकसान नहीं हुआ। महावीर कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड, कृष्णा कॉलोनी, गुरुनानकपुरा कॉलोनी के कुछ हिस्सों तथा टीबी अस्पताल के सामने गोहाना रोड पर बारिश का पानी एकत्रित हुआ। उसे भी निकाल दिया गया। मुआवजे का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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मुख्यमंत्री बोले, ज्यादा बारिश होने का मतलब यह नहीं कि व्यवस्था न हो
विधानसभा में कांग्रेस विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इस बार बारिश ज्यादा हुई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। जहां तक रोहतक की बात है वह जनस्वास्थ्य विभाग के सचिव को कहेंगे कि पूरे विषय की जांच हो, कि आखिर क्या क्या कारण थे कि मौके पर वहां सिस्टम से काम नहीं हुआ।